
उत्तर प्रदेश के आगरा में लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ करने वाले नकली दवाओं के एक बड़े और खतरनाक सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। जिले के मलपुरा क्षेत्र में एक अवैध दवा गोदाम पर मारे गए छापे की दहशत के चलते तस्करों ने ट्रांस यमुना क्षेत्र की झाड़ियों में भारी मात्रा में नकली दवाएं फेंक दीं। पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि झाड़ियों में फेंकी गई इन जानलेवा दवाओं का सीधा संबंध मलपुरा में पकड़े गए उसी अवैध गोदाम से है, और अब इस मामले में दो नए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
घटनाक्रम के विस्तार में जाएं तो 8 अक्तूबर को ट्रांस यमुना स्थित कांशीराम आवास और भवानी सिंह इंटर कॉलेज के पास कूड़े के ढेर व झाड़ियों में प्लास्टिक के कट्टों में भरी हुई एलोपैथिक दवाएं लावारिस हालत में बरामद की गई थीं। जब औषधि विभाग की टीम ने इन बरामद दवाओं के बैच नंबर का मिलान किया, तो वे 29 सितंबर को मलपुरा के अवैध गोदाम से जब्त की गई नकली दवाओं के बैच से पूरी तरह मेल खा गए।
जांच में यह बात खुलकर सामने आई कि मलपुरा में पुलिस की छापेमारी के दौरान इकरार नामक आरोपी के पकड़े जाने और जेल जाने के बाद, उसके दो सालों— इस्लाम नगर निवासी जाकिर और शाकिर ने पुलिस के खौफ से इन नकली दवाओं को ठिकाने लगाने के लिए झाड़ियों में फेंक दिया था।
इस गंभीर मामले में त्वरित कानूनी कार्रवाई करते हुए औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा ने झाड़ियों से बरामद की गई 13 दवाओं के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। इसके साथ ही, जाकिर और शाकिर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सुसंगत धाराओं के तहत नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
आगरा के डीसीपी सिटी, सैयद अली अब्बास ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मलपुरा गोदाम के मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज है, और अब झाड़ियों में दवा मिलने के इस नए मामले को जोड़ते हुए इसमें पूर्व में पकड़े गए और फरार चल रहे मुख्य आरोपियों के नाम भी शामिल किए जाएंगे। आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस टीमों को सक्रिय कर दिया गया है।
इन सब सख्त कार्रवाइयों के बावजूद, पुलिस महकमे की नाकामी भी साफ नजर आ रही है क्योंकि इस पूरे गोरखधंधे का मुख्य सरगना हिमांशु अग्रवाल अभी तक पुलिस की पहुंच से दूर है। हिमांशु अग्रवाल कोतवाली स्थित ‘हे मां मेडिको’ फर्म का संचालक है, जिसे पूर्व में एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत देने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है।
29 सितंबर को मलपुरा गोदाम पर छापे के बाद दर्ज की गई एफआईआर में हिमांशु अग्रवाल और दवाओं के मुख्य सप्लायर आशीष जैन को नामजद किया गया था, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस इन दोनों शातिर आरोपियों को गिरफ्तार करने में विफल रही है।



