
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशियाई खेल 2026 में देश का पहला स्वर्ण पदक हासिल किया है । उन्होंने निशिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में खेले गए एशियाई खेलों के क्रिकेट फाइनल में श्रीलंका को 147 रनों से हराकर यह पदक जीता। दिन की शुरुआत स्मृति मंधाना और शफाली वर्मा की सलामी जोड़ी के शानदार बल्लेबाजी प्रदर्शन से हुई। दोनों ने मिलकर 99 रनों की साझेदारी की, जिसमें शफाली ने 29 गेंदों में 48 रन बनाए। उनके आउट होने के बाद स्मृति ने मोर्चा संभाला और 45 गेंदों में 79 रन बनाए। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए कप्तान हरमनप्रीत कौर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाईं और इसी दौरान स्मृति ने पारी को गति दी।
पवेलियन लौटने के बाद ऋचा घोष ने श्रीलंका के गेंदबाजों को चौंका दिया। सिलीगुड़ी में जन्मी इस खिलाड़ी ने मैच का रुख ही बदल दिया, जिसे श्रीलंका ने मध्य ओवरों में थोड़ा अपने पक्ष में कर लिया था। विकेटकीपर-बल्लेबाज ने 22 गेंदों में नाबाद 49 रन बनाए और भारत ने पहली पारी में 216 रन खड़े किए। यह एशियाई खेलों के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है। इसी बीच, स्मृति ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 11,000 रन भी पूरे कर लिए। बल्ले से शानदार प्रदर्शन के बाद, शेफाली ने दूसरी पारी में गेंद से भी दबदबा कायम किया। स्पिनर ने दो ओवरों में सिर्फ तीन रन देकर दो विकेट लिए, वहीं दीप्ति शर्मा और श्री चरानी भी उतनी ही प्रभावी रहीं। दोनों स्पिनरों ने तीन-तीन विकेट लिए, जबकि श्रेयांका पाटिल ने दो विकेट हासिल किए।
श्रीलंका की पूरी पारी कप्तान चमारी अथापथ्थु के कंधों पर टिकी थी, लेकिन फाइनल मुकाबले में वह उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं। अनुभवी ऑलराउंडर ने 21 गेंदों में 29 रन बनाए, लेकिन पारी के सातवें ओवर में दीप्ति ने उन्हें आउट कर दिया। उनके आउट होने के बाद, भारत के लिए मैच जीतना तय था और ठीक वैसा ही हुआ। अब, पिछले कुछ वर्षों में, श्रीलंका की चमारी अथापथ्थु पर अत्यधिक निर्भरता ने उन्हें काफी नुकसान पहुंचाया है और भारत के खिलाफ फाइनल भी इसका अपवाद नहीं था। उनके अलावा, कोई भी खिलाड़ी 20 रन से अधिक नहीं बना सका और यह उनकी बल्लेबाजी की कमजोरी को दर्शाता है, खासकर ऐसे मैच में जहां टीम 217 रनों का पीछा कर रही थी।



