
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के एक अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घोटाले के कारण बैंक पर नियामक (रेगुलेटरी) प्रतिबंध लग गए हैं, जिससे जमाकर्ताओं के करीब 124 करोड़ रुपये बैंक में फंस गए हैं।
अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई डूबते देख लगभग 50 जमाकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य के समाज कल्याण मंत्री खजान दास के नेतृत्व में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलने उनके आधिकारिक आवास पर पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में अधिकृत प्रतिनिधि अचिन गुप्ता और 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला जमाकर्ता मंजू झाम भी शामिल थीं, जो इस वित्तीय संकट से सीधे तौर पर प्रभावित हुई हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को इस पूरे प्रकरण से अवगत कराते हुए आरोप लगाया कि यह महज कोई व्यापारिक विफलता नहीं है, बल्कि एक ‘सुनियोजित और लंबे समय से चल रही वित्तीय अनियमितता’ का परिणाम है। प्रतिनिधि अचिन गुप्ता ने बताया कि हजारों ग्राहकों ने इस संस्था को सुरक्षित और विनियमित मानकर अपनी जीवन भर की जमापूंजी इसमें निवेश की थी, लेकिन अब प्रतिबंधों के कारण वे अपने ही 124 करोड़ रुपये नहीं निकाल पा रहे हैं।
जमाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बैंक की बिगड़ती आर्थिक स्थिति आपराधिक कृत्यों का नतीजा हो सकती है। उन्होंने बैंक के अध्यक्ष (चेयरमैन), निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स), प्रबंधन और कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच की मांग की है।
इस घोटाले में भाई-भतीजावाद और परिवारवाद के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। जमाकर्ताओं का कहना है कि साल 1998 से ही बैंक के अध्यक्ष पद पर एक ही परिवार का कब्जा रहा है; पूर्व अध्यक्ष राकेश ममगाईं के बाद उनके बेटे मयंक ममगाईं ने यह कुर्सी संभाल ली।इसके अलावा, आरोप है कि बैंक के निदेशक मंडल में नियुक्त कई सदस्य—जैसे राजकुमार सिंह, चांदनी कुकरेती, चंद्रा देवी, अभिनव कुमार, प्रवीण डबराल, हरीश कृष्ण रतूड़ी और नेहा ममगाईं—प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अध्यक्ष के रिश्तेदार हैं।
स्टाफ की भर्ती में भी नियमों को ताक पर रखकर अध्यक्ष के करीबियों (अंकुज कुकरेती, भूपेश उनियाल, संतोष भट्ट आदि) को भारी-भरकम वेतन पर नियुक्त किया गया।मंत्री खजान दास और अचिन गुप्ता ने इस बात पर भी गहरा अचरज जताया कि 2012-13 से लेकर 2025-26 तक रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नियुक्त ऑडिटर्स ने इतनी बड़ी गड़बड़ियों को कैसे अनदेखा कर दिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरी शिकायत का कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने जमाकर्ताओं की पीड़ा को समझते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सीएम धामी ने गढ़वाल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) और देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमेंद्र डोभाल को तुरंत एक्शन लेने का आदेश दिया है।
अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण और बैंक के प्रबंधन पर लगे संगीन आरोपों की जांच के लिए जल्द ही एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी, ताकि दोषियों पर शिकंजा कसा जा सके और आम जनता का फंसा हुआ पैसा वापस दिलाने के रास्ते तलाशे जा सकें।



