
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की कम अवधि पर सवाल उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि केवल चार दिनों का यह सत्र जनहित व जनकल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने चिंता जताई कि लगातार घटते जा रहे विधानसभा सत्र लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर विषय हैं और यह सवाल उठाया कि क्या इतना संक्षिप्त सत्र अपने वास्तविक उद्देश्यों को पूरा कर पाएगा या महज एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
बसपा प्रमुख ने बढ़ती अफसरशाही पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नौकरशाही को संविधान की शपथ के प्रति जवाबदेह और जनता के हितों के वास्ते जिम्मेदार बनाए रखने के लिए विधायिका के संवैधानिक प्रभाव को मजबूत करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के संविधान और लोकतंत्र को मजबूत करने में विधायिका की भूमिका सबसे अहम होती है, जिसके लिए सरकार और विपक्ष दोनों को गंभीर संसदीय आचरण अपनाना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बरकरार रह सके।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह मानसून सत्र आज से शुरू हुआ है और प्रदेश सरकार कल यानी 4 अगस्त को सदन में अनुपूरक बजट पेश करेगी।




