
असम मंत्रिमंडल ने बुधवार को राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी, लेकिन मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि आदिवासी आबादी को इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने सरकार के प्रमुख के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करने के बाद यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यूसीसी विधेयक 26 मई को नई विधानसभा के समक्ष पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह मंत्रिमंडल की पहली बैठक में लिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय है और यह चुनाव के दौरान किए गए हमारे वादे के अनुरूप है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि उत्तराखंड, गोवा और गुजरात में पहले ही यूसीसी लागू हो चुका है, लेकिन उनकी सरकार ने इसे असम की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया है। उन्होंने कहा, “हमने आदिवासी आबादी को यूसीसी के दायरे से पूरी तरह से बाहर रखा है। असम के लोगों द्वारा पालन किए जाने वाले सभी रीति-रिवाज, परंपराएं और प्रथाएं यूसीसी के दायरे से बाहर हैं।” उन्होंने आगे कहा कि यूसीसी उत्तराधिकार, विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप और विवाह एवं तलाक के अनिवार्य पंजीकरण से संबंधित मामलों को देखेगा।


