दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी से जुड़े विवादित कंटेंट पर सख्त कदम उठाया है। जस्टिस मनी पुष्करणा की बेंच ने मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को आदेश दिया कि हिमायनी पुरी का नाम कुख्यात जेफ्री एपस्टीन से जोड़ने वाली कोई भी सामग्री भारत में 24 घंटे के भीतर हटा दी जाए।
हिमायनी पुरी की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने दलील दी कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही यह सामग्री पूरी तरह निराधार है और इससे उनकी छवि को गंभीर नुकसान हो रहा है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर कंटेंट हटाने की मांग की।
मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम) की ओर से वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कहा कि कोर्ट को पूरे विश्व में ब्लॉक का आदेश नहीं देना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे मामलों में आमतौर पर केवल भारत तक सीमित प्रतिबंध लगाया जाता है और एक समान मुद्दा पहले से सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच में लंबित है। गूगल की ओर से भी यही दलील रखी गई।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपों की सच्चाई जांच का विषय है और अदालत इस पर फैसला नहीं दे रही। हालांकि, अंतरिम राहत देते हुए कोर्ट ने गलत और भ्रामक जानकारी को तुरंत हटाने का निर्देश दिया।
यह मामला हाल ही में जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और गलत लिंक्स से जुड़ा है। हिमायनी पुरी ने याचिका में ऐसी सामग्री को हटाने और भविष्य में इसके प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग की है।



