
मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के दूसरे हफ्ते में ईरान की मिसाइल हमलों की संख्या में काफी कमी आई है। शुरुआती दिनों में अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी के हमलों के जवाब में ईरान ने बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे, जिसमें मध्य पूर्व के कई देशों में नागरिक ढांचे जैसे एयरपोर्ट, तेल-गैस टर्मिनल और लग्जरी होटल निशाना बने थे। लेकिन अब हमले कम लेकिन अधिक सोचे-समझे और प्रभावी हो गए हैं।
अमेरिका और इजरायल इस कमी को अपनी सफलता बता रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि ईरान के कम से कम 75% मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए गए हैं, जिससे ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च क्षमता 90% तक कम हो गई है। यूएस जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन और अन्य अधिकारियों ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान की मिसाइल फायरिंग में 86-90% की गिरावट आई है, और ड्रोन हमलों में भी 73-80% कमी है।
ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एयरोस्पेस फोर्स के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल सैयद माजिद मूसवी ने घोषणा की कि अब रणनीति में बदलाव आया है। ईरान अब एक टन से कम वजन वाले वारहेड वाली मिसाइलें नहीं छोड़ेगा। इसके बजाय भारी विस्फोटक पेलोड (एक टन या उससे ज्यादा) वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे हमलों की तीव्रता और दायरा बढ़ेगा। IRGC ने कहा कि यह बदलाव युद्ध की नई रणनीति का हिस्सा है, न कि लॉन्चरों के नष्ट होने का नतीजा। हाल के हमलों में खैबर शेखन और खोर्रमशहर-4 जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल देखा गया है, जिनमें 1.5-1.8 टन तक के वारहेड हैं।


