राजनीति गरमाई हुई है क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स बिजनेस इंटरव्यू में कहा कि वाशिंगटन ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। यह फैसला मध्य पूर्व संकट (ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने) के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में कमी के बीच लिया गया है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि अमेरिका ने मोदी सरकार को “डोनाल्ड ट्रंप के आदेश मानने का प्रमाणपत्र” दे दिया है। रमेश ने कहा कि “56 इंच का सीना” दिखाने वाला नेतृत्व अब “कायरतापूर्ण और समझौतावादी” हो गया है।
अमेरिकी बयान का सार
बेसेंट ने बताया कि भारत ने पहले अमेरिका के कहने पर रूसी तेल खरीद कम की थी और अमेरिकी तेल लेने की योजना थी। लेकिन वैश्विक कमी के कारण यह 30 दिन की छूट दी गई, जो पहले से समुद्र में फंसे तेल पर लागू है।
सरकार का जवाब
सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है। पर्याप्त भंडार हैं और स्टॉक बढ़ाया जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने X पर स्पष्ट किया कि सरकार सस्ता और टिकाऊ ईंधन सुनिश्चित करने में सक्षम है।
पृष्ठभूमि
28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इज़राइल हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ा। ईरान ने जवाबी हमले किए, जिससे तेल मार्ग प्रभावित हुए। भारत अपना 40% तेल आयात पश्चिम एशिया से करता है।
यह मुद्दा भारत की ऊर्जा नीति और विदेशी प्रभाव पर राजनीतिक बहस छेड़ रहा है।



