28 फरवरी को अमेरिका ने इज़राइल के साथ मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस ऑपरेशन का मकसद ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करना, उसकी नौसेना को नष्ट करना और मौजूदा शासन को उखाड़ फेंकना है।
हमले की शुरुआत में ही तेहरान में उच्च स्तरीय बैठक पर हमला हुआ। ईरानी राज्य मीडिया ने 1 मार्च को पुष्टि की कि सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य और खुफिया अधिकारी मारे गए। अब अंतरिम नेतृत्व परिषद देश संभाल रही है।
ईरान ने जवाब में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों और सहयोगी देशों पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए। बहरीन में अमेरिकी पांचवीं फ्लीट मुख्यालय, कतर का अल उदैद एयर बेस, यूएई, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब के ठिकाने निशाना बने। इज़राइल में तेल अवीव और हाइफा जैसे शहरों पर भी मिसाइल हमले हुए।
अमेरिका ने ईरानी नौसेना और IRGC के जहाजों को निशाना बनाया ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद न हो सके। हालांकि ईरान के माइन और एंटी-शिप मिसाइल खतरा बरकरार है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में बड़ी रुकावट आई है, जिससे ऊर्जा कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और जहाजों के रूट बदल रहे हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने छह अमेरिकी सैनिकों की मौत और 18 के घायल होने की पुष्टि की। इज़राइल में भी कम से कम 10 लोग मारे गए। ईरान में सैकड़ों सैनिक और नागरिकों की मौत की खबरें हैं। स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है और मानवीय संकट बढ़ रहा है।



