
भारत एक ऐसा देश है जहां प्राचीन धार्मिक स्थलों की कोई कमी नहीं है। हर एक की अपनी अलग कहानी और विशेषता है। इनके बारे में जानकर इंसान आश्चर्यचकित हो जाता है। एक ऐसी ही अजीबोगरीब जगह और उसकी कहानी के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं जिसके बारे में जानकर आप भी सोच में पड़ जाएंगे।
पिथौरागढ़ में स्थित शिवधाम की। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में मोस्टा मानो मंदिर के नाम से मशहूर इस चमत्कारिक मंदिर की बात ही कुछ और है। यहां एक ऐसा अलौकिक पत्थर है जिसके सामने वैज्ञानिक सिद्धान्त भी फेल हो जाते हैं।
लाख ताकत लगाने के बाद भी इस पत्थर को हिला पाना नामुमकिन है। लोगों का ऐसा दावा है कि ताकतवर से ताकतवर इंसान उस पत्थर को हिला नहीं पाता है, लेकिन जब कोई महादेव का नाम लेकर उसे उठाने का प्रयास करता है तो वह सफल होता है।
अब इसके पीछे का राज क्या है इसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इसे अपने कंधे पर उठा लेता है उसका भाग्य परिवर्तन हो जाता है।
उस इंसान को जिंदगी में दोबारा पीछे मुड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है। बता दें कि मोस्टा देवता भगवान शिव के ही एक रुप हैं। यह मंदिर चंडाक वन के इलाके में स्थित है।
इस चंडाक वन का नाता मां काली से है। पौराणिक कहानियों के अनुसार, मां काली को चुनौती देने के लिए शुंभ-निशुम्भ ने बलशाली राक्षस चंड-मुंड को उनके पास भेजा।
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इससे क्रोधित होकर मां काली ने चामुंडा का अवतार लेकर चंड-मुंड का वध कर दिया। ऐसी मान्यता है कि चंडाक वन ही वह स्थान है जहां चंड-मुंड का वध किया गया था।
स्थानीय लोगों का ऐसा कहना है कि शिवलिंग की तरह नजर आने वाले इस पत्थर को नेपाल से यहां लाया गया था। वहां से लाकर उसे जिस स्थान पर रखा गया वहां से आजतक इसे कोई हिला नहीं पाया है।