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बेकार नहीं जाएंगे 500-1000 के नोट, फिर होगी वापसी

500-1000 रुपए के नोटनई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद से 500-1000 रुपए के नोट महज कागज के टुकड़े मात्र ही रह गए। खबरों की गर मानें तो, अब कुल नोटों के मूल्य के 86 प्रतिशत के बराबर नोट बेकार हो जाएंगे, जिनकी कीमत लगभग 2300 करोड़ है। ऐसे में सभी के दिमाग में बस एक ही सवाल है कि आखिर इन पुराने नोटों के साथ क्या किया जाएगा? बहुत से लोगों का मानना है कि ये नोट नष्ट नहीं किए जाएंगे, इनका किसी न किसी रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

बहुत से लोगों ने कहा है कि इन नोटों को फाइलें, कैलेंडर्स जैसी चीजें बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही, जो नोट तय मानक के हिसाब से सही-सलामत अवस्था में हैं, उन्हें नई करेंसी में बदलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

आरबीआई ने क्या कहा?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सालाना 2700 करोड़ रुपए करेंसी के निर्माण में खर्च करता है। भारत में 98 प्रतिशत कन्ज्यूमर पेमेंट कैश द्वारा किए जाते हैं। खबरों के मुताबिक, लगभग पूरी तैयारी कर ली गई है। करेंसी को पतले-पतले टुकड़ों में काटा जाएगा और फिर उनका उपयोग किया जाएगा। इन नोटों को इस तरह काटा जाएगा कि टुकड़ों को फिर से जोड़कर नोट न बनाए जा सकें। फिर इन टुकड़ों को एक ह्यूमिडिफायर में डाला जाएगा, जो इन्हें ब्रिकेट्स यानी ईंट जैसे टुकड़ों में बदल देंगे। इन टुकड़ों को ठेकेदारों को दिया जाएगा, जो मुख्य रूप से इनका उपयोग गड्ढे भरने में करते हैं।

कहां क्या होता है?

अमेरिका में फेडरल रिजर्व बैंक चलन से बाहर हुए नोटों को छोटे-छोटे हिस्सों में काट देता है, जिनका उपयोग कलात्मक कार्यों के लिए किया जाता है। दुनिया के कुछ देशों में चलन से बाहर हो चुके नोटों का इस्तेमाल घर को गर्म करने के लिए भी किया जाता है। कई जगहों पर चलन से बाहर हुए करेंसी नोटों को ब्रिकेट्स में बदलकर समाजसेवी संगठनों को दे दिया गया।

एवरेस्ट से 300 गुना ऊंचा होगा 500-1000 के नोटों का ढेर

500-1000 रुपए के नोट 23 बिलियन (2300 करोड़ रुपए) चलन से बाहर हैं। ब्लूमबर्ग का मानना है कि, अगर इन्हें एक साथ लाया जाए, तो यह माउंट एवरेस्ट से 300 गुना ऊंचा ढेर बन जाएगा।

अब तक कितने रुपये पहुंचे बैंक?

31 मार्च, 2016 तक देश की अर्थव्यवस्था में 500-1000 रुपये के नोट की कुल कीमत 14.95 लाख करोड़ रुपये थी। यानी, जितनी नकदी सर्कुलेशन में है, उसका 86 फीसदी। सैद्धांतिक तौर पर देखें तो अब यह सारा पैसा बैंकों, डाकघरों के जरिए वास्तविक और आधिकारिक अर्थव्यवस्था में आ जाएगा। करीब 6 लाख करोड़ रुपये तो बैंकों में जमा करवाए भी जा चुके हैं।

 

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