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20 दिन में ही झेल गए, यहां तो 30 साल से लागू है नोटबंदी

1986 में ही नोट बैन पर अमलनई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 500 और 1000 के नोट बैन कर दी हैं। इसके बाद से ही देश में लोगों के अलग-अलग तरह के बयान सामने आ रहे हैं। जहां देश की ज्यादातर जनता ने पीएम मोदी के इस फैसले को स्वीकार किया है। वहीं इसी देश के बहुत सी जनसँख्या ऐसी भी है जो नोटबंदी को गलत मान रही है। विपक्षी पार्टियाँ भी इस फैसले का काफी बवाल बनाते नजर आ रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में पीएम मोदी ने जिस फैसले आज लागू किया है, साल 1986 में ही नोट बैन पर अमल कर देश के एक शहर ने सिर आँखों पर रख लिया था। ऐसा कहा जाता है कि 10 सालों से यहाँ के लोगों ने नोट की शक्ल तक नहीं देखी है।

1986 में ही नोट बैन पर अमल

ख़बरों के मुताबिक़ नोटबंदी के फैसले के बाद से यहां के लोगों में ना तो 500-1000 के नोट बदलवाने की टेंशन दिखी और ना डेली खर्चों पर कोई फर्क पड़ा। फिर चाहे चेन्नई से 150 किमी दूर मौजूद ऑरोविले शहर की बात करें या अहमदाबाद से 85 किमी दूर अकोदरा गांव की। इसकी वजह यहां 1986 में ही नोट बैन पर अमल कर कैशलेस इकोनॉमी चालू है।

बता दें, ऑरोविले में तो नोटों का चलन तब से बंद है जब भारत में 500 रुपए के नोट छपने भी शुरु नहीं हुए थे। वहीं, अकोदरा में सबसे कम पढ़ा-लिखा इंसान भी आज मोबाइल से पेमेंट करता है। देश में पहली बार 500 रुपए का नोट 1987 में आया था।

1968 में बने ऑरोविले इंटरनेशनल टाउन में 1985-86 में एक फाइनेंशियल सर्विस सेंटर स्टार्ट किया गया। तब से ये आरबीआई की परमिशन लेकर बैंक की तरह ही काम करता है। यहां रहने वाले लोग अपना पैसा ऑनलाइन या ऑफलाइन जमा कराते हैं। इसके बदले ऑरोविले फाइनेंशियल सर्विस (एएफएस) एक अकाउंट नंबर देता है।

एएफएस के इंचार्ज रत्नम के मुताबिक, ऑरोविले के करीब 200 कमर्शियल सेंटर और छोटी-बड़ी दुकानों पर इसी अकाउंट नंबर को बता कर खरीददारी की जाती है।वहीं, यहां आने वाले गेस्ट और वॉलिन्टियर के लिए डेबिट कार्ड की तरह एक ऑरो कार्ड जारी किया जाता है।

रत्नम का कहना है कि कुल मिलाकर ऑरोविले की सीमा के अंदर की दुकानों पर तो कैश से पेमेंट का कोई सिस्टम नहीं है। लेकिन शहर के बाहर से जरूरी सामान मंगाने के लिए ऑनलाइन सुविधा ना होने पर कभी-कभी कैश पेमेंट करना पड़ता है। जरूरत पड़ने पर कुछ टूरिस्टों को भी इमोशनल ग्राउंड पर छूट दे दी जाती है।

ऑरोविले टाउन तमिलनाडु के विलुप्पुरम जिले में है। चेन्नई से इसकी दूरी 150 किमी और पुड्डुचेरी से 10 किमी है। दुकान में जाकर जो लेना है उसका ऑर्डर करता है। फिर बिल बनता है।

ऑरो अकाउंट से पेमेंट करने की स्थिति में खरीददार अपना अकाउंट नंबर बताता है। दुकानदार इस नंबर को सिस्टम में डालता है।  आईडेंटिटी वेरिफाई होने के बाद बिल में लिखा अमाउंट खरीददार के अकाउंट से कट जाता है।

वहीं, ऑरो कार्ड से पेमेंट करने वाले लोग अपना कार्ड दुकानदार को देते हैं। वो खास तरह की मशीन से कार्ड को टच कराता है। उसके बाद पहले D टाइप करता है, फिर बिल में लिखा अमाउंट लिखता है। अंत में कोड के माध्यम से पेमेंट खरीददार के खाते से कट जाता है। दोनों कंडीशन में पेमेंट की प्रॉसेस 20 से 40 सेकंड में पूरी हो जाती है। इस प्रोसेस के तहत खरीदारी के लिए मिनिमम 5 रुपए और मैक्सिमम की कोई लिमिट नहीं है।

इतना ही नहीं खरीदारी के लिए यहाँ कोई नियत सीमा नहीं है। दिन जितनी भी बार चाहें यहाँ खरीदारी की जा सकती है। इसलिए यहाँ के लोगों को नोट न होने पर कोई भी समस्या नहीं आती।

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