19 साल के युवा सलामी बल्लेबाज ने चौके-छक्कों की करी बरसात, ठोका दोहरा शतक…

इंग्लैंड की सरजमीं पर सबसे पहले प्रतिस्पर्धी क्रिकेट का शुभारंभ हुआ है। कोरोना वायरस महामारी के बीच इंग्लैंड में इंटरनेशनल क्रिकेट की बहाली हुई थी और अब अगस्त में यहां घरेलू क्रिकेट भी शुरू हो गई है। इंग्लैंड में फिलहाल बॉब विलिस ट्रॉफी 2020 का आयोजन किया जा रहा है। ये टूर्नामेंट इंग्लैंड में खेली जानी वाली फर्स्ट क्लास क्रिकेट का हिस्सा है। हालांकि, मुख्य रूप से इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट प्रथम श्रेणी क्रिकेट में गिनी जाती है, लेकिन ये सीरीज भी काफी अहम होती है। इसी सीरीज में एक 19 साल के युवा सलामी बल्लेबाज ने दोहरा शतक ठोका है।

बॉब विलिस ट्रॉफी में एक मुकाबला साउथ ग्रुप की टीम केंट और ससेक्स की टीम के बीच 8 अगस्त से शुरू हुआ था। इस मुकाबले में ससेक्स की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 94.3 ओवर में सभी विकेट खोकर 332 रन बनाए थे। इस टीम में कोई भी बल्लेबाज शतक नहीं जड़ सका था। सबसे ज्यादा 98 रन की पारी कप्तान बी ब्राउन ने खेली थी। उनके अलावा 65 रन टॉम क्लार्क ने बनाए थे। वहीं, जब केंट की टीम बल्लेबाजी करने उतरी तो ओपनर डी बेल ड्रमंड और जॉर्डन कॉक्स के बीच 100 रन से ज्यादा की साझेदारी हुई, लेकिन यहां ड्रमंड 43 रन बनाकर आउट हुए।

ड्रमंड के आउट होने के बाद जॉर्डन कॉक्स का साथ देने के लिए मैदान पर आए जैक लीनिंग ने पारी को आगे बढ़ाया। दोनों के बीच पहले 100, फिर 200, फिर 300 और फिर 400 रन की साझेदारी हो गई। इस बीच जॉर्डन कॉक्स और जैक लीनिंग दोनों ही बल्लेबाजों ने अपने अर्धशतक को शतक, शतक को दोहरे शतक में तब्दील कर दिया और टीम का स्कोर 500 के पार पहुंचा दिया। इस बीच कप्तान सैम बिलिंग्स ने पारी की घोषणा कर दी। 332 रन के जवाब में 1 विकेट खोकर केंट की टीम ने 530 रन बना दिए और फिर ससेक्स को 173 रन पर ढेर कर मैच पारी और 25 रन से जीत लिया।

इस मुकाबले में 19 वर्षीय जॉर्डन कॉक्स ने 345 गेंदों में 27 चौके और 3 छक्कों की मदद से नाबाद 238 रन की पारी खेली। उनके साथी बल्लेबाज जैक लीनिंग ने 308 गेंदों में 220 रन बनाए, जिसमें 29 चौके शामिल थे। बता दें कि इस टूर्नामेंट में केंट की टीम का ये दूसरा मुकाबला था, जिसे टीम ने बड़े अंतर से जीता, लेकिन इससे पहले केंट की टीम को अपने पहले मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था, जिसमें जॉर्डन कॉक्स और ड्रमंड अच्छी बल्लेबाजी नहीं कर पाए थे। उस मैच में डी बेल ड्रमंड खुद कप्तानी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

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