ऐतिहासिक मेला चैती मे संपन्न हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन

लखीमपुर खीरी/गोला गोकर्ण नाथ:ऐतिहासिक चैती मेला के मंच पर नरेश सिंह तोमर की अध्यक्षता में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन नगर पलिका परिषद चेयरमैन मीनाक्षी अग्रवाल उप जिलाधिकारी विनोद कुमार गुप्ता सीओ अवनीश चन्द्र श्रीवास्तव व नगर के सभी सभासदों के मध्य संपन्न हुआ,कवि सम्मेलन की प्रमुख बागडोर नगर के सभासद पद पर विराजमान काशी विश्वनाथ तिवारी के गौरवशाली पुत्र ओज कवि कनक तिवारी ने संभाली काव्य पाठ का शुभारंभ लखनऊ से पधारी कवित्री कविता तिवारी ने माँ शारदे का गुण गान करते हुए पंक्तियों के माध्यम से.सारा धारा तुम्हारे गीत गा रही हैं,,ऐसा लगा तू माँ मधुरिमा वीणा बजा रही हैं के साथ किया इसी बीच राष्ट्रीय कवि पद्म श्री/यश भारती जैसे सम्मानित गौरव से परिपूर्ण डां०सुनील जोगी ने अपने काव्य पाठ से हास्यास्पद कविताओं से ठाहको और तलियों से लोगों का मन मोह कर सदन की शोभा बढ़ते हुए कवि सम्मेलन की अध्यक्षता पर भी विराजमान रहे इसी संख्ला में पीलीभीत से आये कवि संजीव मिश्र ने.पुकारोगे मुझे जब भी मिलूंगा भोर होने तक की पंक्तियों से सभी श्रोताओं को भाव विभोर किया व विकास बौखल ने कविता से हास्य का प्रवाह करते हुए लोगों के चेहरों पर मुस्कान दी,उन्नाव से आये कवि के.डी.शर्मा(हाहाकारी)ने भी हास्यास्पद पंक्तियों से सभी को जोड़कर 1000 रुपये में 365 धंधो का वर्णन करते हुए कविता से हास्य प्रकट किया सदन में बैठे सभी सम्मानित नगर वसियों ने तलियों से स्वागत करते हुए अभिवादन किया,कवि विनय शुक्ला ने देश भक्ति के जज्बो को लोगों तक पहुँचाते हुए अपनी रचना के माध्यम से.उन्हें नमन जो बलिदानो की अमर कथाएँ छोड़ गये ..सुना कर सभी का मन मोह लिया,इटावा से आये कवि कमलेश शर्मा ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के प्रमाण की बात करने वाले लोगों पर टिप्पणी करते हुए अपनी कविता के माध्यम से प्रमाण देते हुए कण कण में भगवान हैं की बात कह कर गति दी,इसी बीच कवि कुंवर जावेद ने..गुलमोहर गुलजार चमेली,,य गुलाब की प्रिये सहेली के गीत को पढ़ कर प्यार की गहराईयों को छू लिया,कवि डां०अर्जुन सिसौदिया,अशोक टाटमवरी,असीम फिरोजावादी,कमल पांडेय ने भी काव्य पाठ किया,गोला के रहने वाले ओज कवि कनक तिवारी ने हिन्दुस्तान की सच्चाई को प्रकट करते हुए..गौ हत्या करने वाले लाखों में हैं खेल रहे,श्री राम के बेटे घर में कष्ट अनगिनत झेल रहे की रचना को पढ़ कर तलियों की गणगड़हट से सभी के दिलों में देश प्रेम की भावना जागृत की,कवि डां०कुंवर बेचैन ने अपने गीत को गा कर कवि सम्मेलन को ऊँचाइयों पर ले जा कर विराम दिया!

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