1 जुलाई से 5 महीने तक नही बजेगी शहनाईयां जानिए कब है देवशयनी एकादशी

आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का व्रत सबसे उत्तम माना जाता है. इसे आषाढ़ी एकादशी, हरिशयनी और पद्मनाभा एकादशी आदि नाम से भी जाना जाता है. इसे भगवान विष्णु का शयन काल कहा जाता है. पुराणों के अनुसार इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए क्षीरसागर में शयन करते हैं. इसी दिन से चातुर्मास प्रारंभ हो जाते हैं और इस समय में विवाह समेत कई शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं. इस बार देवशयनी एकादशी 1 जुलाई को मनाई जाएगी.

देवशयनी एकादशी का महत्व

मान्यता है कि देवशयनी एकादशी का व्रत करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनके सभी पापों का नाश होता है. इस दिन मंदिरों और मठों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है. आषाढ़ी एकादशी या देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु का शयन प्रारंभ होने से पहले विधि-विधान से पूजन करने का बड़ा महत्व है. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं.

देवशयनी एकादशी की पूजा विधि

– जो लोग देवशयनी एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें प्रात:काल उठकर स्नान करना चाहिए.

– पूजा स्थल को साफ करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा को आसन पर विराजमान कर उनकी पूजा करें.

– भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल, पीला चंदन चढ़ाएं. उनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित करें.

– भगवान विष्णु को पान और सुपारी अर्पित करने के बाद धूप, दीप और पुष्प चढ़ाकर आरती उतारें.

– भगवान विष्णु का पूजन करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन या फलाहार ग्रहण करें.

देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु का शयन काल होता है. इसी दिन से चातुर्मास यानी चौमासे का आरंभ माना जाता है. मान्यता है कि भगवान विष्णु इस दिन से चार मास के लिए निद्रा में रहते हैं इसलिए इस समय में किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.

देवशयनी एकादशी के चार माह बाद भगवान विष्णु निद्रा से जागते हैं इस तिथि को प्रबोधिनी एकादशी या देवउठनी एकादशी कहते हैं. इस साल 4 महीने की जगह चातुर्मास पांच महीने का होने जा रहा है. यानी 1 जुलाई से शुरू होकर यह समय 25 नवंबर तक चलेगा, इसके बाद 26 नवंबर से मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जा सकेगी.

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