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पाकिस्‍तानी शराबियों के अच्‍छे दिन, मिली कोर्ट से राहत

पाकिस्‍तान में शराब

इस्लामाबाद। पाकिस्तान सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को सिंध उच्च न्यायालय के 27 अक्टूबर के उस आदेश को लौटा दिया, जिसमें अदालत ने प्रांत की शराब की दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। इसके साथ ही न्यायालय ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह पुनर्विचार याचिका पर दैनिक आधार पर सुनवाई करे। जियो न्यूज के अनुसार, न्यायमूर्ति साकिब निसार की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने यह व्यवस्था दी। शराब की दुकानों के 124 मालिकों की ओर से सिंध उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पाकिस्‍तान में शराब पीने वालों की एक बार फिर लाट्री लग गयी है।

सभी दुकानों के लाइसेंस रद्द करने के खिलाफ अपील को स्वीवार करने और सिंध उच्च न्यायालय को मामला लौटाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने अगले हफ्ते से दैनिक आधार पर सुनवाई करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति निसार ने सुनवाई के दौरान कहा, “इस आदेश को इस रूप में नहीं लिया जाना चाहिए कि सर्वोच्च न्यायालय ने शराब बेचने की अनुमति दे दी।”

पाकिस्तान हिंदू परिषद के संरक्षक और सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद रमेश कुमार वांकवानी इस सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यह धर्म के नाम पर शराब बेचने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा, “हिंदू धर्म में शराब बेचना और पीना प्रतिबंधित है।”

याचिका दायर करने वालों ने सर्वोच्च न्यायालय के सामने दलील दी कि वे लोग देश के कानून को मानने वाले नागरिक हैं और सरकार को पिछले साल तीन अरब पाकिस्तानी रुपये शुल्क के रूप में दिए हैं।

गत 18 अक्टूबर को सिंध उच्च न्यायालय ने प्रांतीय सरकार और उसके विभागों को शराब की दुकानों की अनुज्ञप्तियां रद्द करने का आदेश जारी किया था।

इनकी दलील है कि इस्लामाबाद, बलूचिस्तान और पंजाब सहित पाकिस्तान के विभिन्न भागों में शराब के कारखाने चलते हैं। इससे कम से कम 24 हजार लोगों की आजीविका चलती है। ये लोग सिंध प्रांत में शराब का खुदरा व्यापार करते हैं।

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