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इस्लाम की शक्ल और सूरत बदलने की तैयारी में चीन, नमाज पहला टारगेट

मस्जिदों के आर्किटेक्टपेइचिंग। चीन ने अपने मुस्लिम नागरिकों को धार्मिक कट्टरता से बचने और समाजवादी मूल्यों को अपनाने की बात कही है। धार्मिक मामलों के एडमिनिस्ट्रेशन के चीफ वांग जुआन ने कहा है कि चीन में बनने वाली मस्जिदों के आर्किटेक्ट में चीनी शिल्पकला की झलक दिखनी चाहिए।  उन्होंने कहा कि मस्जिदों के आर्किटेक्ट में विदेशी स्टाइल की नकल नहीं करनी चाहिए। स्थानीय मीडिया के अनुसार, चीन सरकार नमाज को चीनी भाषा में पढ़ने के लिए नया नियम लाने वाली है। यह वही चीन है जिसने रमजान के पाक महीने में अपने यहां नमाज पर पाबंदी लगा दी थी।

वांग ने कहा कि हम मुस्लिमों के विश्वास और मूल्यों का सम्मान करते हैं, लेकिन राजनीति, शिक्षा और न्याय के क्षेत्रों में धार्मिक दखल को सहन नहीं किया जा सकता है।

चीन ने अशांत सूबे शिनजियांग के मुस्लिमों को चीनी मूल्यों को अपनाने और समाजवाद के करीब आने की सलाह दी है। सूबे के धार्मिक मामलों के एडमिनिस्ट्रेशन के चीफ वांग जुआन ने कहा कि चीनी मुस्लिमों को पूरी क्षमता के साथ धार्मिक कट्टरता का विरोध करना चाहिए। सरकारी एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को चीनी मुस्लिमों की 10वीं राष्ट्रीय कांग्रेस को संबोधित करते हुए वांग जुआन ने कहा कि चीन में इस्लाम के विकास को यहां के मूल्यों से जुड़ा होना चाहिए।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह बीते 5 सालों में इस्लामिक असोसिएशन ऑफ चाइना की ओर से किए गए कार्यों की सराहना करते हैं। वांग का यह बयान चीन सरकार के उन निर्देशों के बाद आया है, जिनमें धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं।

यही नहीं, शिनजियांग सूबे की सरकार ने मुस्लिमों से उनके पासपोर्ट जमा कराने का भी आदेश दिया है। आदेश में कहा गया है कि सूबे के लोगों को स्थानीय पुलिस स्टेशनों पर अपने पासपोर्ट जमा कराने होंगे ताकि उनकी जांच की जा सके।

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