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नोटबंदी से ट्रांसपोर्टस का बुरा हाल, थमे 70 फीसदी ट्रकों के पहिए

नोटबंदीनई दिल्ली: ट्रांसपोर्टस कुलतरण सिंह अटवाल सात ट्रकों के मालिक हैं। अब उनका कहना है कि नोटबंदी के कारण उन्हें अपनी पांच ट्रकों को बंद करना पड़ा है क्योंकि हर ट्रक को चलाने के लिए कम से कम 20,000 रुपये की नकदी होनी चाहिए।

अटवाल कोई अपवाद नहीं हैं। उनके जैसे कई हैं जिन्हें सरकार द्वारा नकदी निकालने की सीमा निर्धारित करने और 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने से नुकसान हुआ है।

नोटबंदी से मोटर ट्रांसपोर्ट का कारोबार करीब 80 फीसदी तक प्रभावित हुआ है।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी), 93 लाख ट्रक मालिकों, 50 लाख बस ऑपरेटरों, टूरिस्ट टैक्सी और मैक्सी कैब की प्रतिनिधि संस्था है। इसका कहना है कि नोटंबदी के कारण उसके सदस्यों के करीब 70 फीसदी वाहन सड़क से उतर गए हैं।

एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति नहीं सुधरती तो न सिर्फ जरूरी चीजों जैसे दूध, फल, सब्जियों और दवाइयों की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी, बल्कि इस उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े 20 करोड़ लोगों का जीवन भी प्रभावित होगा।

अटवाल जोकि एआईएमटीसी के अध्यक्ष भी हैं, ने आईएएनएस से कहा, “वित्त अधिनियम के तहत, मुझे प्रति ट्रक प्रति ट्रिप डीजल और करों के खर्च के लिए 35,000 रुपये की नकदी रखने की अनुमति है। लेकिन कुल निकासी की सीमा महज 50,000 रुपये हैं। ऐसे में मैं कैसे जिंदा रह पाऊंगा? सरकार को या तो लेनदेन की सीमा बढ़ानी चाहिए, या इस क्षेत्र में चेक से भुगतान की मंजूरी देनी चाहिए।”

कुछ ऐसा ही एआईएमटीसी के सलाहकार और पूर्व अध्यक्ष बाल मलकीत सिंह का कहना है। वे कहते हैं, “50,000 रुपये की निकासी सीमा से हमारे ऑपरेटर बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इससे सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है। जरूरी चीजों की आपूर्ति धीमी हो गई है और कई जगहों पर तो पूरी तरह रुक गई है।”

ट्रक एसोसिएशन ने अपना घर चलाने के लिए छूट की मांग की है, क्योंकि उनके उद्योग ने वित्त वर्ष 2015-16 में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 4.8 फीसदी का योगदान दिया, जोकि कुल 5,44,800 करोड़ रुपये की रकम है। यह रोजना लगभग 1,492 करोड़ रुपये है। इस उद्योग में 80 फीसदी लेनदेन नकद होता है।

कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेवाल का कहना है, “बाजार में नकदी की कमी के कारण व्यापारी भी उतने ही प्रभावित हुए हैं, जितना ट्रांसपोर्ट क्षेत्र हुआ है। क्योंकि दोनों ही क्षेत्रों का व्यापार नकदी पर आधारित है। हमारे व्यापार में नोटबंदी के कारण 75 फीसदी की गिरावट आई है। नोटबंदी के बाद से 60 फीसदी माल की ढुलाई हो नहीं पाई है।”

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