सोचो बेटी क्या है? सीता, सकीना या मरियम ?

  • pictures-on-save-girl-childकूडे मे फेकी दो दिन की मासूम बच्ची

मेरठ :  क्या बेटी होने की एसी सजा है जो दो दिन की मासूम बच्ची को तपती धूप मे कूडी पर फेंक दिया लेकिन जिसका कोई नहीं होता उसका उपर वाला होता है| भगवान किसी ना किसी रूप मे मदद को आ ही जाते हैं किसी ने अपने जिगर के टुकड़े को इस तरह फेंक दिया तो एक एसे जोड़े ने बच्ची को अपना लिया जिनके पहले से ही एक बेटी है| गुरूवार की तपती धूप मे ये नवजात बच्ची खतता रोड पर पड़ी थी यहां से गुजर रहे रेसना गाँव के लोगों ने इसे देख लिया| भीड़ इकट्ठा हो गई लोग बच्ची को लेकर रेसना गाँव आ गऐ| यहाँ निवासी परविन नामक युवक ने बच्ची को आपनाने की बात कही तो बच्ची को सोप दी गई| परविन को पहले से ही एक बेटी है परविन की पत्नी प्रीति ने बच्ची को गोद मे लिया तो उसकी खुशी देखते ही बन रही थी| परविन मजदूर है इस बात के लिए सभी उसकी दिल खोलकर प्रशंसा कर रहे है|

बेटी बचाओ का डरावना सच –

एक तरफ जहाँ बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान चलाया जा रहा है वहीं यह घटना इस अभियान का डरावना सच है| आज भी बेटिया भर बनती है| परिवार का ऐसी सोच रखने वाले समाज को रूड़ी बना रहे है| वही ऐसे लोगो की करनी उन दूध मुहे बच्चों की बेवक़्त मौत का कारण बनती है जो देश की सारी परम्पराओं को व सरकारी संविधानों की धज्जियां उड़ानें वालो की कानून के प्रति निष्ठा नहीं होने का प्रतीक बनती जा रही है|

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