सेहतमंद रहने और संक्रमण से बचाव के कुछ ऐसे तरीकों को अपनी जीवनशैली में करें शामिल..

लंबे समय तक घर में ही रहते हुए लोगों ने समय पर जागने, व्यायाम करने और पौष्टिक भोजन का सेवन करने जैसी अच्छी आदतों को दिनचर्या में शामिल किया। कोरोना संक्रमण के चलते अधिसंख्य लोगों को घर से ही ऑफिस के काम निपटाने पड़े। अब अनलॉक-4 की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन कोरोना का खतरा टला नहीं है। इसलिए सेहतमंद रहने और संक्रमण से बचाव के तरीकों को अपनी जीवनशैली में शामिल करें। जानें क्‍या कहते है जनरल फिजीशियन डॉ. अनिल भदौरिया

हम सभी को यह सुनिश्चित करना होगा कि अनलॉक-4 के इस संस्करण के शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि अभी तक जिस तरह से हम घर में रहकर अनुशासित जीवनशैली जी रहे थे, उसे नजरअंदाज करें। अभी भी हमें कोरोना संक्रमण से बचने के सारे उपाय ठीक उसी तरह से अपनाने होंगे, जैसे अभी तक हम घरों में रहकर अपना रहे थे, क्योंकि खतरा अभी टला नहीं है और जब तक कोई वैक्सीन नहीं आ जाती है, तब तक हमें इससे बचाव और उपाय के सारे तरीके अपनाने होंगे। कोरोना संक्रमण ने हमें हर तरह से क्षति पहुंचाई है, लेकिन इससे यह संदेश भी मिला है कि मुश्किल हालातों से हमें किस तरह बचकर निकलना है। अभी तक हमारे पास कोरोना से लड़ने के दो ही उपाय हैं, जिनमें पहला है स्वच्छता तो दूसरा है हमारा सेहतमंद होना।

यह सुनहरा मौका मिला है कि हम अपना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दुरुस्त रखें। हमें इस बात का भी ध्यान रखना है कि बिना जरूरी काम के घर से बाहर नहीं निकलना है तो इसका मतलब यह भी नहीं है कि टीवी के सामने बैठकर समय पास करें, सिर्फ बिस्तर पर आराम फरमाएं या मनपसंद खानपान का तर्क देते हुए आवश्यकता से अधिक कैलोरीज का सेवन करने लग जाएं। ये गलतियां मोटापा, ब्लड शुगर, हाई ब्लड प्रेशर और मांसपेशियों से जुड़ी समस्या पैदा कर सकती हैं। यह आवश्यक होगा कि शरीर को इतना स्वस्थ और निरोगी बना लें कि बाहर निकलने पर हर तरह के संक्रमण से लड़ने की ताकत बनी रहे।

लंच के बाद सोना ठीक नहीं : दोपहर में भोजन के बाद यदि सो जाएंगे तो न केवल हाजमा खराब होगा, बल्कि कई तरह के शारीरिक नुकसान होंगे। दरअसल, लेटने के दौरान मेटाबॉलिज्म की दर धीमी हो जाती है। नींद आ जाने से आपका भोजन पचेगा नहीं साथ ही वह ऊर्जा में भी तब्दील नहीं होगा। यह भोजन फैट के रूप में परिवर्तित हो जाता है। दोपहर के इस समय को आप कुछ क्रिएटिव हॉबी पूरा करने में बिता सकते हैं। विशेष ध्यान रखना है कि घर में रहते समय किसी भी एक स्थान पर ज्यादा देर तक न बैठें।

घर की साफ-सफाई या किचन के काम में मां, बहन या पत्नी का सहयोग कर सकते हैं। शारीरिक गतिविधियां करते रहें। हर वक्त मोबाइल में व्यस्त रहने या रिमोट हाथ में लिए टीवी के सामने बैठे रहने से न केवल रीढ़ की हड्डी पर जोर आएगा, बल्कि जो भोजन किया है वह हजम भी नहीं होगा। इसके अलावा शाम के समय बच्चों के साथ मनोरंजन करने के लिए आंगन में कुछ खेल सकते हैं। यदि आंगन नहीं है तो छत पर जा सकते हैं। शारीरिक दूरी के नियम का पालन करते हुए छत पर दूसरों के साथ भी बातचीत कर सकते हैं। मनोरंजन के लिए शारीरिक दूरी बरतते हुए अंताक्षरी जैसे खेल भी खेल सकते हैं। जिन्हें रात के भोजन के पश्चात आधा घंटे टहलने की आदत है वे छत पर स्मार्टफोन पर संगीत सुनते हुए टहल सकते हैं।

सीमित संसाधनों का करें उपयोग : लॉकडाउन के दिन मितव्ययता सिखाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे हैं। हम जानते हैं कि हमारे संसाधन सीमित हैं और आर्थिक परिदृश्य भी प्रभावित हुआ है। इसलिए लॉकडाउन के दौरान सभी समझ गए हैं कि कम में ही काम चलाना है। बार-बार चाय नाश्ते की जिन्हें आदत थी, वे इस पर लगाम लगाना सीख गए हैं। बार-बार चाय-कॉफी लेने के बजाय काढ़ा पीने की आदत विकसित करें। पौष्टिकता से भरपूर काढ़ा स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन आयुर्वेदिक नुस्खा है।

कैसी हो दिनचर्या : सुबह उठकर कम से कम 5000 कदम चलने का कार्यक्रम सबसे पहले पूरा करें। घर के बगीचे या छत पर टहल सकते हैं। ऐसा करने से न केवल आपको सूर्योदय के समय शुद्ध वायु प्राप्त होगी, बल्कि शरीर की एक्स्ट्रा शुगर भी खर्च होगी। पसीना आने से ब्लड प्रेशर का स्तर नीचे आएगा। पैदल चलने से मांसपेशियों में एक नई ऊर्जा उत्पन्न होगी। मांसपेशियों को मजबूती मिलने के साथ ही हड्डियां भी मजबूत होंगी। किसी भी प्रकार का नियमित व्यायाम करने का एक फायदा यह होगा कि उम्रदराज होने के पश्चात हड्डियों के कमजोर होने की स्थिति से उबर सकेंगे। ऐसे लोग जो चलने में असमर्थ हैं, वे योग और प्राणायाम करने का अभ्यास करें, ताकि हृदय गति सुचारू रहे और मांसपेशियों का रक्तसंचार बेहतर हो सके। योगासनों का अभ्यास शाम को भी दोहरा सकते हैं। 20-20 नियम का पालन करें यानी 20 मिनट से अधिक देर न बैठें और 20 मिनट से अधिक समय तक स्क्रीन की ओर न देखें। यहां स्क्रीन का अर्थ लैपटॉप, मोबाइल, टीवी और गेम्स गैजेट्स आदि से है।

सादा व कम भोजन करें : भोजन से पेट पूरा भरने की बजाय एक चौथाई हिस्सा खाली रखने को उनोदर कहा जाता है। पेट का एक चौथाई हिस्सा खाली रहेगा तो दिन में नींद नहीं आएगी साथ ही स्फूर्ति भी बनी रहेगी। शारीरिक गतिविधियां कम हों तो ऐसा करना सेहतमंद रखने के लिहाज से बेहतर है।

घर के सदस्यों का रखें ख्याल : कोरोना संक्रमण का खतरा अभी टला नहीं है। बुजुर्गों और बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न जानें दें, क्योंकि उन्हें कोरोना संक्रमण का अधिक खतरा है। यदि घर से बाहर निकलना जरूरी है तो मास्क, सेनिटाइजर का इस्तेमाल करते हुए संक्रमण से सुरक्षा के अन्य नियमों का पालन अवश्य करें।

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