सबके ऑफिस टाइम फिक्स हैं, तो पुलिस के क्यों नहीं

investigation-copyलखनऊ
सबके ऑफिस टाइम फिक्स हैं, तो पुलिस के क्यों नहीं

– राम नाईक ने कहा कि सेवा में जितने भी लोग हैं सबसे ऑफिस के टाइम फिक्स हैं।
– सबको पता है कि 9 या 10 बजे जाना है। 5 या 6 बजे अपने घर लौट आना है, लेकिन पुलिस के साथ ऐसा नहीं है। इसलिए उनके काम के घंटे भी कम करने की जरुरत हैं।

सबसे बड़े प्रदेश के लिए बड़ी हैं चुनौतियां

– राम नाईक ने कहा कि आबादी के लिहाज से यह सबसे बड़ा प्रदेश है।
– इसलिए पुलिस के लिए चुनौतियां भी सबसे बड़ी हैं। पुलिस को आधुनिक बनना होगा और लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा।

काम के घंटे कम हो तो शांति से खा सकते हैं खाना

– राम नाईक के वीकली ऑफ के समर्थन के बाद बेहद आशान्वित दिख रहे पुलिस कर्मियों ने कहा कि जब से ड्यूटी ज्वाइन की है, तब से खाना खाते वक्‍त भी यही लगता है कि कहीं कुछ हो न जाए कि बीच में खाना छोड़कर जाना पड़ जाए।

शासन में चल रही है वीक ऑफ की बात

– बता दें, सरकार द्वारा पुलिस कर्मियों को वीकली ऑफ देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।
– अगर शासन द्वारा इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल जाएगी तो पुलिस कर्मियों को हर सप्ताह में एक दिन की छुट्टी मिलेगी। थाने वार हर सिपाही के वीक ऑफ का रोस्टर होगा।

पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने की काम के घंटे फिक्स करने की मांग

– पुलिस विभाग में पुलिस सुधारों के प्रणेता रहे पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने कहा कि पुलिस के काम के घंटे को कम करना होगा।
– सरकार को चाहिए कि पुलिस के काम के घंटे को 24 घंटे से घटाकर 8 घंटे फिक्स करे।

गवर्नर ने किया पुलिस अधि‍कारियों का सम्‍मान।
लखनऊ. पुलिस वीक के पहले दिन रैतिक परेड के बाद गवर्नर राम नाईक ने पुलिस कर्मियों को वीक ऑफ दिए जाने की पैरवी की। उन्होंने कहा कि अगर मौके पर सीएम मौजूद होते तो वह उनसे इस बात के लिए गुजारिश करते। गवर्नर के इस आश्वासन के बाद वहां मौजूद लोगों ने तालिया बजाकर उनका स्वागत किया।

शुरू हुआ पुलिस वीक
– एक अप्रैल से शुरू हुए तीन दिवसीय पुलिस वीक के शुभारम्भ पर गवर्नर राम नाईक ने परेड की सलामी ली।
– इस मौके पर डीजीपी सैय्यद जावीद अहमद के अलावा प्रदेश भर से आए पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।

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