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शिवसेना के सुभाष देसाई का इस्तीफा मंत्रिमंडल से नामंजूर

सुभाष देसाईमुंबई| मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा मंत्रिमंडल के दो सदस्यों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की घोषणा किए जाने के एक दिन बाद गठबंधन सहयोगी शिवसेना के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया, हालांकि उसे नामंजूर कर दिया गया।

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देसाई ने अपने त्यागपत्र के साथ फडणवीस से मुलाकात की, लेकिन मुख्यमंत्री ने इस्तीफा नामंजूर कर दिया। मुख्यमंत्री ने देसाई का इस्तीफा नामंजूर करने से पहले शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से बात की। उन्होंने देसाई से पद पर बने रहने को कहा।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि देसाई (75) पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के काफी करीबी माने जाते हैं। दोनों की शुक्रवार रात हुई मुलाकात के बाद देसाई ने इस्तीफा देने का फैसला किया।

आवास मंत्री प्रकाश मेहता और देसाई के खिलाफ विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बाद फडणवीस ने शुक्रवार को आरोपों की जांच की घोषणा की।

भाजपा के सूत्रों का दावा है कि दबाव बनने पर मेहता ने शुक्रवार रात अपने इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन फडणवीस ने उसे नामंजूर कर दिया, जिस पर उन्हें शनिवार को विपक्षी कांग्रेस से कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी।

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कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, “यह सब स्वांग है। जांच की घोषणा, इस्तीफे की पेशकश और फिर उसे अस्वीकार कर दिया जाना.. (पूर्व भाजपा मंत्री) एकनाथ खड़से और अन्य के लिए अलग मापदंड क्यों हैं।”

ठाकरे ने विपक्ष पर जवाबी हमला करते हुए विभिन्न घोटालों के आरोपी कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग की।

उन्होंने कहा, “जो लोग खुद घोटालों के आरोपी हैं, वे हमारे मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं..उन्होंने अपने गलत कार्यो पर से ध्यान हटाने के लिए इन मुद्दों को लेकर विधानसभा सत्र को बाधित किया।”

उन्होंने कहा कि फडणवीस से चर्चा के बाद फैसला लिया गया कि देसाई का मंत्रिमंडल से इस्तीफा जरूरी नहीं है।

देसाई पर निजी बिल्डर्स को लाभ पहुंचाने के लिए एमआईडीसी नासिक की करीब 12,000 हेक्टेयर भूमि कथित तौर पर डिनोटीफाई करने का आरोप है।

जबकि मेहता पर कांग्रेस-राकांपा ने मुंबई में झुग्गी बस्ती पुनर्वास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

फडणवीस ने मेहता के खिलाफ लोकायुक्त एम.एल. तहिलयानी द्वारा और देसाई के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारक ब्यूरो द्वारा जांच का आश्वासन दिया है।

विपक्ष ने दोनों मंत्रियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय और एक विशेष जांच दल द्वारा जांच कराए जाने की मांग की है।

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