विमानन किराया बाजार से निर्धारित होना चाहिए : विशेषज्ञ

विमानन किरायानई दिल्ली| यात्रियों को जहां टिकट रद्द किए जाने, किराया वापसी और सामानों के किराये संबंधी नए सरकारी प्रस्तावों के लागू होने की उम्मीद है, वहीं विमानन क्षेत्र के जानकारों ने चेतावनी दी है कि इन प्रस्तावों के लागू किए जाने से किराया बढ़ेगा। उन्होंने साथ ही सुझाव दिया है कि विमानन किराया घटाने या इजाफा करने का सूक्ष्म प्रबंधन नहीं किया जाना चाहिए।

विमानन किराया हो निर्धारित

वैश्विक परामर्श कंपनी केपीएमजी के भारतीय विमानन और रक्षा कारोबार के प्रमुख और साझेदार अंबर दूबे ने कहा, “सरकार को सूक्ष्म प्रबंधन से बचना चाहिए।”

उन्होंने शुक्रवार के प्रस्ताव के बारे में कहा, “अधिक किराया वसूलने वाली और यात्रियों को असुविधा पहुंचाने वाली विमानन कंपनियों को तो मुख प्रचार और सोशल मीडिया से ही सजा मिल जाएगी।”

टिकट रद्द किए जाने के मामले में सरकार का प्रस्ताव है कि कंपनियों को सभी कर वापस करने चाहिए और बुनियादी किराये से एक पैसा भी अधिक शुल्क नहीं लेना चाहिए। कई यात्री प्रस्तावों के लागू होने के पक्ष में हैं।

मदुरै निवासी जी. नटराजन ने कहा, “4,500 रुपये के किराये पर 2,000 रुपये री-शीड्यूलिंग शुल्क देना हास्यास्पद है। मेरे खयाल से प्रस्ताव में इस बात पर गौर किया गया है। इसके अलावा अतिरिक्त सामान पर 300 रुपये या इससे अधिक शुल्क भी काफी अधिक है। 100 रुपये की सीमा वाजिब है।”

नागरिक उड्डयन मंत्री पी. अशोक गजपति राजू ने शनिवार को नया प्रस्ताव पेश किया और कहा कि उनके मंत्रालय के वेबसाइट पर ये प्रस्ताव लोगों के सुझाव लेने के लिए 15 दिन तक रहेंगे। उसके बाद जितनी जल्दी हो सके इन्हें लागू कर दिया जाएगा।

प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं : यात्री के उड़ान के लिए नहीं पहुंचने पर या टिकट रद्द किए जाने की स्थिति में सभी प्रकार के कर, शुल्क और उपयोग तथा हवाईअड्डा विकास शुल्क वापस किए जाएंगे। 15 किलोग्राम सामान के बाद अतिरिक्त पांच किलोग्राम वजन तक अधिकतम 100 रुपये शुल्क और यात्रा से वंचित किए जाने पर यात्री के मुआवजे में भारी वृद्धि।

राजू ने कहा, “किसी भी स्थिति में रद्दीकरण शुल्क बुनियादी शुल्क से अधिक नहीं होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि पैसा वापस करने की जिम्मेदारी पूरी तरह विमानन कंपनी की होगी, भले ही यात्री ने एजेंट या ट्रैवल पोर्टल के सहारे टिकट बुक कराए हों। साथ ही घरेलू यात्रा के मामले में पैसे 15 दिनों के भीतर और अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के मामले में पैसे 30 दिनों के अंदर वापस कर दिए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा, “यह यात्री तय करेंगे कि वे वापसी नकद रूप में चाहते हैं या राशि को अपने क्रेडिट खाते में रखना चाहते हैं।”

यात्रा से वंचित किए जाने के एक घंटे के बाद यदि वैकल्पिक उड़ान का इंतजाम कर दिया जाए, तो उसके लिए किसी प्रकार के मुआवजे का प्रस्ताव नहीं है, लेकिन एक घंटे से अधिक की देरी होने पर कंपनी को बुनियादी शुल्क का 400 फीसदी और विमान ईंधन शुल्क मुआवजे के रूप में देना होगा, जो अधिकतम 20 हजार रुपये होगा। यदि यात्री वैकल्पिक उड़ान लेने से इनकार कर दे, तब भी कंपनी को इसी आधार पर मुआवजा देना होगा।

यात्रा डॉट कॉम के अध्यक्ष शरत ढल ने चेतावनी दी कि इन्हें लागू करने से विमानन किराया बढ़ेगा।

उन्होंने कहा, “ये सकारात्मक प्रस्ताव हैं, लेकिन इनका लाभ कुछ ही यात्रियों को मिलेगा। किराये में भी वृद्धि हो सकती है।”

पीडब्ल्यूसी के विमानन और रक्षा निदेशक राजीव चिब ने आईएएनएस से कहा, “प्रस्ताव सर्वोत्तम वैश्विक मानकों के अनुरूप है। इन प्रस्तावों का संबंध नियमन से कम और ग्राहक सेवा में सुधार से अधिक है।”

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