लोकसभा चुनाव में मायावती ने भी दिया था भाजपा को समर्थन

download (10)आज बसपाइ भी बोल बैठे कि लोकसभा चुनाव मोदी की जीत नहीं बल्कि मुस्लिमो की हार थी। शनिवार को मुज़फ्फरनगर के नुमाइश पंडाल में आयोजित कार्यकर्त्ता सम्मेलन में बोलते हुए राज्य सभा सदस्य राजपाल सैनी ने जनता से सवाल करते हुए कहा कि आप लोगो ने मोदी को वोट सिर्फ इसलिए दी थी ताकि मुस्लिमो का भला न हो सके, और कहा कि देश के प्रधानमन्त्री पाकिस्तान जाकर नवाज शरिफ के यहाँ बिरयानी खाकर चले आते है। आखिर बसपा नेता लोगो को तो उनके किये का अहसास करा रहे है, मगर लोकसभा चुनाव के समय इसी तरह की नसीहत मायावती को भी कर देते तो बेहतर होता, क्योकि उस समय आपकी राष्ट्रिय अध्यक्ष ने भी भाजपा को समर्थन दे दिया था। नेक रे नेक पहले अप्पा तो देख। उस समय आप लोगो में अकले सलाहियत नहीं थी, चलो ये मान भी लिया जाये कि आपके अनुसार लोगो की तरह आपको भी ये नहीं मालूम था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी मुस्लिमो को कुछ नहीं कहेगे, न काला धन वापस लायेगे, न दाऊद इब्राहिम को वापस लायेगे और न ही पाकिस्तान को मुह तोड़ जवाब देंगे, न ही हर हिंदुस्तानी को लखपति बनायेगे। मगर जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में क्या मोदी ने सभी वादे पूरे कर दिए थे जो बसपा के नेताओ ने भाजपा का चुनाव में पूरा सहयोग किया था। मोदी सरकार के विरुद्ध जब कहा थी तुम्हारी ये नफरत, क्या उस समय मुज़फ्फरनगर से चुनाव में एक दलित की बेटी नहीं खड़ी थी। तब कहा था डॉ अम्बेडकर से मिला हुआ अनुशासन।  यदि उस समय भी मोदी सरकार में कोई कमी नहीं दिखी तो फिर हाल ही में हुए उपचुनाव सभी को याद है, जिसमे बसपा द्वारा अपना प्रत्याशी न खड़ा करना मकशद सीधा भाजपा को फायदा पहुँचाना था। तो फिर जनता को दोषी बताना किसी बेवकूूफियत जाहिर करने से कम नहीं। क्योकि किसी को नसीहत देने से पहले खुद उस पर अमल करे तो दूसरो पर  ज़्यादा बेहतर असर होता है।बसपा राश्ट्रीय महासचिव नासिमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि अब उन्हें भी डॉ आंबेडकर याद आने लगे जो उनके रस्ते में रोड़े अटकाते थे।इस ब्यान से उनकी छोटी सोच जाहिर होती है। किसी को याद करना कोई गलत बात नही, क्योंकि यादे, और दिल में सम्मान इंसान के दूर होने से ही पैदा होता है।   बयान को सुनकर ऐसा महसूस होता है जैसे दुश्मनी दोस्ती में तब्दील होना किसी कबीरा गुनाह से कम नही, सिद्दीकी के ब्यान के अनुसार किसी की काबिलियत का देर से अहसास होना गुनाह अज़ीम करने से कम नहीं। यदि इस बात में सौ फीसदी  सच्चाई है तो फिर………वो कहावत देर आये दुरुस्त आये बे बुनियाद ही कही जायेगी।

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