लखनऊ में खेल निदेशालय के सामने मानदेय न मिलने से नाराज करीब 22 प्रशिक्षकों ने जताया विरोध

अप्रैल माह से मानदेय न मिलने से बुधवार को खेल प्रशिक्षकों का गुस्सा आखिरकार फूट ही गया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में खेल निदेशालय के सामने करीब 22-23 प्रशिक्षकों ने इसके विरोध में अंशकालिक खेल प्रशिक्षकों ने जूता पॉलिश करने के साथ ही खेल निदेशालय के बाहर ठेला लगाकर सामान तक बेचा। हालांकि, इस दौरान पुलिस ने उन सबको बल-पूर्वक खेदड़ दिया। इसके बाद भी वे नहीं माने और सभी प्रशिक्षकों ने बैडमिंटन हॉल के सामने बैठकर खेल विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। फिलहाल, खेल विभाग के तमाम आला अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधकर बैठ गए हैं।

खेल प्रशिक्षकों के मुताबिक, निदेशालय के बाहर अपने जीविर्कोपार्जन के लिए पटरी पर दुकानें लगाई हैं। इसमें से बहुत सारे अंशकालिक खेल प्रशिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को तैयार किया। आज दिन यह है कि खेल प्रशिक्षक भुखमरी के कगार पर आ गये हैं, क्योंकि खेल निदेशालय द्वारा संचालित प्रशिक्षण शिविर इस समय निदेशालय ने बंद कर रखा है। जबकि प्रशिक्षण शिविर की रिन्यूवल की संस्तुति विभिन्न जनपदों की क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारियों द्वारा फरवरी माह में ही कर दी गई थी। खेल निदेशालय की मनमानी इतनी अधिक है कि वह न ही श्रम मंत्रालय की बात सुनते हैं और न ही किसी जीओ को मानते हैं। क्योंकि श्रम मंत्रालय का आदेश था कि किसी भी कर्मचारी का वेतन न काटा जाए, जबकि खेल विभाग ने इसका उल्टा ही किया। 24 मार्च 2020 को हम सभी खेल प्रशिक्षकों को कार्य मुक्त कर दिया गया है, जबकि हमारा रिन्यूवल एक अप्रैल 2020 को होना था। पर अभी तक सरकार ने हमारा रिन्यूवल नहीं किया है, जबकि सरकार के अन्य विभागों में सभी संविदा कर्मचारियों की सेवा बहाल की है।

 हमारी मांग है कि सरकार एक अप्रैल 2020 से हम सभी 450 खेल प्रशिक्षकों का रिन्यूवल मानकर अब तक का वेतन और अन्य विभागों की तरह सेवा निरंतर रखा जाए। 

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