बन पाएगी 2014 वाली बात? भाजपा दिखा रही सॉफ्ट कॉर्नर लेकिन शिवसेना अभी भी जिद पर!

नई दिल्ली। चुनावों की डेट पास आते-आते सियासी गलियारों में जोड़तोड़ का सिलसिला लगातार जारी है। इस बीच महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच पड़ी दरार के चलते गठबंधन को लेकर संशय बना हुआ है।

जहां एक ओर हाल ही में भाजपा ने शिवसेना के लिए गठजोड़ का द्वार खुला छोड़ने का इशारा दिया। वहीं शिवसेना अभी भी अकेले दम पर चुनाव लड़ने का दम भर रही है।

इन पहलुओं को देखते हुए ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा अभी भी अकेले चुनावी मैदान में उतरने के लिए हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के गठबंधन की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं, जिससे बीजेपी की बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है।

खबरों के मुताबिक़ एक निजी समाचार चैनल से बातचीत में महराष्ट्र बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता माधव भंडारी ने शिवसेना के हमलों और अकेले लड़ने के रुख के बीच कहा है कि दोनों पार्टियों ने पिछले लोकसभा चुनावों में साथ लड़ा है और इस बार भी चीजें बदली नहीं हैं। भंडारी ने इस सवाल के जवाब में भी कुछ नहीं कहा कि क्या बीजेपी इन चुनावों में अकेले ही लड़ेगी।

उनके इस बयान से इशारा मिलता है कि बीजेपी अब भी गठबंधन के दरवाजे खुले रख रही है। बीजेपी का रुख शिवसेना को लेकर बदला है।

वहीं इससे पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी इशारे किए थे कि बीजेपी इन चुनावों में अकेली लड़ने को तैयार है। लेकिन महराष्ट्र बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता के बयान से एक बार फिर उहापोह की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

इसके पहले अमित शाह के ‘पटक देंगे’ वाली टिप्पणी ने भी शिवसेना के गुस्से की आग में घी डालने का काम किया था। दरअसल, कुछ हफ्ते पहले शाह ने महाराष्ट्र के बीजेपी सांसदों को इन चुनावों में अकेले लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा था।

उन्होंने ये भी कहा था कि जो भी सहयोगी पार्टी बीजेपी के साथ नहीं आना चाहती है, बीजेपी उन्हें बाहर फेंक देगी।

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इसके बाद बीजेपी महाराष्ट्र के एक सीनियर नेता ने बहुत रात गए दिल्ली में शाह से मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शाह को राज्य के हालात की जानकारी दी। इसके बाद पीएम मोदी भी महाराष्ट्र कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेने गए लेकिन उन्होंने भी गठबंधन पर कुछ नहीं बोला है।

लेकिन नेपथ्य में चल रही इन हलचलों से ये इशारा साफ मिलता है कि बीजेपी अभी तक खुद को अकेले लड़ने के लिए तैयार नहीं कर पाई है और गठबंधन के रास्ते खुले रखना चाहती है। लेकिन शिवसेना अब भी अपने विद्रोही रुख पर अड़ी हुई है।

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शिवसेना की प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने कहा कि ‘हम एनडीए का हिस्सा हैं लेकिन बीजेपी एनडीए के अपने किसी भी सहयोगी को अहमियत नहीं दी है। हमने परफॉर्म करने की कोशिश की है। हमारे एक-एक मंत्रियों ने लोगों के हितों के मुद्दे उठाए हैं। उद्धव जी पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि हम इन चुनावों में अकेले लड़ेंगे।’

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