फिट रहने और दिल को सुरक्षित रखने के लिए विदेशियों को खूब भा रही अलसी

फिट रहने और दिल को सुरक्षित रहने की चाहत यूं तो सभी की होती है, लेकिन विदेश में लोग स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा जागरूक हैं। खासतौर पर मलेशिया, जापान, आस्ट्रेलिया और ताईवान के लोग। उन्हेंं ओमेगा थ्री की काफी मात्रा वाली चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) की अलसी काफी पसंद आई है। उन्होंने इसके तेल को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। कई तरह की दवाएं बनाने पर प्रयोग किया जा रहा है।

सीएसए के तिलहन अनुभाग ने अलसी की कई प्रजातियां विकसित की हैं। इनमें से ज्यादातर में तेल निकलता है, जबकि कुछ में फाइबर की मात्रा अधिक रहती है। प्रजातियों को विकसित करने के बाद उन्हेंं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) और नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जैनेटिक रिसोर्स को भेजा जाता है। देशभर के कृषि विश्व विद्यालयों और कृषि केंद्रों में टेस्टिंग होती है। जांच में बेहतर परिणाम आने के बाद इनके बीज उत्पादन को हरी झंडी मिलती है। विश्वविद्यालय की सूर्या प्रजाति सबसे ज्यादा पसंद की गई। इसमें तेल 40 फीसद मिला, जबकि ओमेगा थ्री की मात्रा 62 फीसद रही। इंदु और उमा प्रजाति को भी विदेशियों ने सेहतमंद ठहराया है। दोनों में ओमेगा थ्री की मात्रा 54 फीसद मिली। सीएसए अब तक अलसी की 27 प्रजाति विकसित कर चुका है।

सीएसए ने खोजीं अलसी की प्रजातियां

प्रजातियां         तेल      ओमेगा थ्री

सूर्या  40  62

इंदु  42  54

उमा  41  54

शुभ्रा  44  53

शेखर  43  54

अपर्णा  39  52

( नोट : मात्रा फीसद में है)

उत्पादन में पांचवें नंबर पर भारत

सीएसए की प्रो. नलिनी तिवारी ने बताया कि अलसी की खेती करने में भारत तीसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर कजाकिस्तान, दूसरे पर कनाडा और तीसरे पर भारत व चीन है। उत्पादन में कनाडा पहले, कजाकिस्तान दूसरे, चीन तीसरे, यूएसए चौथे और भारत पांचवे नंबर पर है। अलसी में प्रोटीन, मिनरल्स, काबोहाईड्रेट््स और सात तरह के अमीनो एसिड्स रहते हैं। ओमेगा थ्री और ओमेगा सिक्स एक तरह का अमीनो एसिड होता है।

दिल के लिए फायदेमंद

डाइबिटोलॉजिस्ट डॉ. नंदिनी रस्तोगी ने बताया कि ओमेगा थ्री दिल के लिए फायदेमंद रहता है। यह खून को पतला करने में मदद करता है। इसमें कैंसर को रोकने वाले तत्व रहते हैं। दिमाग का विकास करता है।

इनका ये है कहना

अलसी की कई प्रजातियां विदेशों में काफी पसंद की जा रही हैं। इनको वहां की जलवायु के हिसाब से और विकसित किया जा रहा है। तीन से चार प्रजातियों में ओमेगा थ्री की मात्रा काफी अधिक है। इनका दवाएं बनाने में प्रयोग किया जा रहा है।

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