पूर्वी अफ्रीका से नौकरी छोड़ आए राहुल पाल ने तैयार किए निरोगी बीज 1800 किसानों को मिला फायदा

विदेश से अच्छे पैकेज की नौकरी छोड़कर स्वदेश लौटे राहुल पाल ने अपनों के लिए कुछ बेहतर करने की ठानी और लगन से तस्वीर बदल डाली। उनके आलू के निरोगी बीज, टिश्यू कल्चर विधि से तैयार किए केला, सागौन और चंदन के पौधे किसानों के घर खुशहाली ला रहे हैं। फर्रुखाबाद के साथ आसपास जनपदों के करीब 1800 किसानों को इसका फायदा मिला है। अन्य किसानों को मुनाफा कमाते देख दो हजार से अधिक किसान आलू बीज के लिए बुकिंग करवा चुके हैं।

फर्रुखाबाद के कमालगंज ब्लॉक अंतर्गत शृंगीरामपुर निवासी राहुल पाल बताते हैं कि बायोटेक्नोलॉजी से एमएससी, एमबीए और एमफिल करने के बाद एक साल तक पूर्वी अफ्रीका स्थित नेशनल एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट््यूट में नौकरी की। यहां आलू की फसल में अक्सर रोग लगने से किसानों को नुकसान होने की जानकारी मिलती रहती थी। उनके लिए कुछ करने की चाहत वापस ले आई।

आलू पर सबसे ज्यादा फोकस

वह बताते हैं कि गांव में गुणवत्ता भरे निरोगी बीज व पौधे तैयार किए। वाजिब दाम में अच्छे बीज किसानों को देने के साथ आलू पर ज्यादा फोकस है। कन्नौज, फर्रुखाबाद समेत आसपास आलू बेल्ट को उनकी तकनीक का खूब फायदा मिला है। टिश्यूकल्चर से तैयार आलू की पैदावार भी बढ़ी है।

ऐसे तैयार करते हैं बीज

केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र (सीपीआरआइ) शिमला से उन्नतशील प्रजाति का मदर प्लांट लाकर टिश्यू के जरिए पौधे तैयार करते हैं। उसके बाद पहली पीढ़ी का बीज तैयार करते हैं। खेतों में उसे बोकर दूसरी और तीसरी पीढ़ी का बनाते हैं। यही तीसरी पीढ़ी का बीज फाउंडेशन-1 (एफ-1) के नाम से तैयार होता है, जिसे किसान अपने खेत में इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने तरबूज, ककड़ी, तरोई के पौधे भी तैयार किए हैं। पाली हाउस में जरूरी तापमान पर कोकोपिट में ये पौधे उगाते हैं।

केस-एक : कमालगंज के प्रगतिशील किसान जेपी कटियार पहले आलू का सामान्य बीज बोते थे तो पैदावार 45 पैकेट प्रति बीघा होती थी। वायरस फ्री आलू बोने से अब पैदावार 95 पैकेट हुई। इससे मुनाफा दोगुना हो गया। वायरस रहित बीज होने के कारण बाजार में हाथोंहाथ बिकता है।

केस-दो : याकूतगंज के पंकज गुप्ता ने भी पिछले वर्ष टिश्यूकल्चर से तैयार आलू बीज की बोआई की तो उनके खेत में 90 पैकेट प्रति बीघा उत्पादन हुआ जबकि सामान्य बीज से 43 से 45 पैकेट आलू ही होता था। बाजार में इस बार चार हजार रुपये प्रति पैकेट आलू की मांग है।

इनका ये है कहना

जनपद में शृंगीरामपुर स्थित निजी टिश्यू कल्चर लैब में आलू व केला दोनों पर काम हो रहा है। जिले में सरकारी लैब खुलवाने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव देंगे।

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