भारत और चीन एक दूसरे का कुछ नहीं कर पाएंगे, डोकलाम विवाद कोई गंभीर मुद्दा नहीं

डोकलाम क्षेत्रनई दिल्ली। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने बुधवार को कहा कि डोकलाम क्षेत्र में भारत और चीनी सैनिकों के बीच जारी विवाद ‘ज्यादा गंभीर नहीं है।’ दलाई लामा ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में ‘स्वतंत्र प्रेस और नैतिकता के महत्व’ पर वार्षिक राजेंद्र माथुर व्याख्यान देने के बाद एक प्रश्न के जवाब में कहा, “चिंता न करें। दोनों पक्ष बड़े बड़े शब्द बोल रहे हें। लेकिन, अंत में हिंदी चीनी भाई भाई हैं। यही एकमात्र रास्ता है।”

उन्होंने कहा कि भारत और चीन दोनों बड़े देश हैं और दोनों में से किसी में भी दूसरे को मिटाने की क्षमता नहीं है।

दलाई लामा ने कहा, “अस्थायी तौर पर कुछ कटु शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है।”

चीन की ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ द्वारा मध्य जून में प्रत्यक्ष तौर पर एक सड़क निर्माण के लिए डोकलाम क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद से भारत और चीन की सीमाओं के बीच गतिरोध जारी है।

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भारत और भूटान का इस मामले में कहना है कि चीन के कृत्य के कारण भारत-भूटान-चीन के तिहरे मिलन बिंदु पर यथास्थिति का उल्लंघन हुआ है, वहीं चीन ने इस दावे के साथ कि वह क्षेत्र चीनी भूभाग का हिस्सा है, भारतीय सेना को हटाने की मांग की है।

भारत डोकलाम क्षेत्र से दोनों पक्षों की सेनाओं को एक साथ हटाए जाने के अपने रुख पर कायम है।

दलाई लामा ने कहा, “मैं चीन के लोगों से प्यार करता हूं। वे सभ्य और परिश्रमी हैं।”

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उन्होंने कहा कि (चीन की) सरकार की सोच ‘अलग है’, लेकिन इतने दशकों में उसकी सोच में भी बदलाव आया है।

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