जाने क्यों चीखते हुए डीएम के पैरों में गिरी बेटी, बोली- योगी जी न्याय दो

कानपुर के रामादेवी स्थित कांशीराम अस्पताल (कोविड लेवल 2) में जलकल कर्मी समेत चार कोरोना मरीजों की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया और जाम लगाने की कोशिश की। जिलाधिकारी व पुलिस बल पहुंचा तो परिजनों ने खूब खरी-खोटी सुनाई। जलकल कर्मी की बेटी ने भी अस्पताल में जमकर हंगामा काटा।

जिलाधिकारी के पैर पकड़ने की कोशिश करके उनके सामने लेट गई। मुख्यमंत्री से दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। पनकी निवासी 53 वर्षीय जलकल कर्मी 25 जुलाई से बुखार से पीड़ित थे। परिजनों ने उन्हें एक हफ्ते तक चुन्नीगंज के प्राइवेट अस्पताल में रखा फिर निजी पैथॉलाजी से कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर सोमवार को कांशीराम अस्पताल में भर्ती कराया था।

मृतक की बेटी ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे सीएमओ से जानकारी मिली थी कि वे एकदम ठीक हैं। फिर दोपहर 1.55 बजे अचानक मौत की जानकारी दी गई। उसकी मां व दो भाई भी कोरोना पॉजिटिव हैं। उन्हें होम आइसोलेशन में रखा गया है। मृतक के छोटे भाई बीजेपी नेता ने बताया कि अस्पताल के एक डॉक्टर ने 4-4 हजार रुपये के इंजेक्शन मंगाए। फिर, पता नहीं लगाए या नहीं।

इसके बाद मरीज को रीजेंसी अस्पताल ले जाने को कहा। बेटी ने कहा कि इतना पैसा कहां से लाते कि रीजेंसी ले जाते। परिजनों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री की व्यवस्था को खूब धिक्कारा। हंगामे की जानकारी पर डीएम डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी पहुंचे। उन्होंने परिजनों की बात सुनी। परिजन डीएम के सामने हाथ जोड़कर लेट गए। डीएम ने कहा कि परिजनों के आरोपों की जांच कराएंगे।

डीएम कुछ समय पूर्व नगर आयुक्त की कांशीराम के निरीक्षण की रिपोर्ट (जिसमें लापरवाही उजागर हुई थी) पर गोलमोल जवाब देते दिखे। इसके बाद अस्पताल प्रशासन के साथ बैठक की। वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उनकी हालत खराब होने पर वेंटिलेटर पर रखा गया था। लेकिन, उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उधर इसी अस्पताल में खलासी लाइन निवासी 80 वर्षीय वृद्ध सोमवार को भर्ती हुए थे। उनकी भी मौत होने के बाद परिजनों ने हंगामा किया। इस दौरान पीड़ितों से पुलिस की नोकझोंक हुई।

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