जानिए बिहार में बीमारियों का प्रकोप , चमकी ही नहीं इन रोगों से भी बच्चों की जा रही हैं जान…

बिहार में चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या 135 पहुंच गई है. पूरे मामले में सरकार खामोश है. सिर्फ मुजफ्फरपुर में ही 117 बच्चों की मौत हो गई. 12 मौतें मोतिहारी और 6 मौतें बेगूसराय में हुई हैं.

 

बच्चो

 

लेकिन बिहार में सिर्फ चमकी बुखार ही बच्चों की मौत का जिम्मेदार नहीं है. अगर डिजीज बर्डन प्रोफाइल को मानें तो 1990 से 2016 तक बिहार में बच्चों की सबसे ज्यादा मौतें डायरिया और नवजात रोगों की वजह से होती हैं. डायरिया प्रोग्रेस रिपोर्ट-18 के अनुसार 2016 में देश में 1.02 लाख बच्चों की मौत हुई थी.

 

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वहीं बिहार में 14 साल तक के करीब 39.5 फीसदी बच्चों की मौत डायरिया से होती है. उसके बाद 31.8 प्रतिशत बच्चे पैदा होने के कुछ महीनों में जन्म संबंधी बीमारियों से मर जाते हैं. इसके बाद 9.5 फीसदी बच्चे पेट संबंधी बीमारियों से मर जाते हैं. वहीं, 5.5 प्रतिशत बच्चों की मौत अन्य गैर-संक्रामक बीमारियों और 3.9 फीसदी की एनटीडी (उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों) मलेरिया से होती है.

देखा जाये तो 26 साल यानी 1990 से 2016 तक बीमारियों की चाल और प्रकोप में बदलाव आया है. 1990 में 2016 तक बीमारियों की सूची में डायरिया पहले स्थान पर था. जबकि, फेफड़े संबंधी बीमारियां दूसरे स्थान से खिसक तीसरे पर चली गईं. वहीं, 1990 में सातवें नंबर पर मौजूद दिल की बीमारियां तीसरे नंबर पर है.

जानिए 1990 की 10 बड़ी बीमारियां जो लेती थीं जान –

  1. डायरिया – 14.1%
  2. फेफड़े संबंधी बीमारियां – 12.3%
  3. खसरा – 7.0%
  4. जन्म संबंधी समस्याएं – 4.2%
  5. टीबी – 3.8%
  6. नवजात रोग – 3.4%
  7. हृदय रोग – 2.8%
  8. सीओपीडी – 2.7%
  9. नियोनेटल इंसिफेलोपैथी – 2.6%
  10. कालाजार – 2.5%

साल 2016 की 10 बड़ी बीमारियां जो लेती थीं जान –

  1. डायरिया – 7.6%
  2. हृदय रोग – 6.6%
  3. फेफड़े संबंधी बीमारियां – 6.4%
  4. आयरन की कमी/एनीमिया – 4.3%
  5. सीओपीडी – 3.9%
  6. जन्म संबंधी समस्याएं – 3.5%
  7. जन्मजात दोष – 3.3%
  8. अन्य नियोनेटल बीमारियां – 2.6%
  9. स्ट्रोक – 2.8%
  10. नियोनेटल इंसिफेलोपैथी – 2.6%

साल 2011 से 2017 तक 28.77 मामले डायरिया के –

दरअसल भारतीय राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल-4 के अनुसार बिहार में 2011 से 2017 तक डायरिया के 28.77 लाख से ज्यादा मामले आए हैं. जहां इन सात सालों में डायरिया से 119 बच्चों की मौत हुई है. करीब 48.3 फीसदी बच्चे उम्र के अनुसार कद में छोटे हैं. 6 महीने से 5 साल तक के 63.5 फीसदी बच्चे एनीमिया के शिकार हैं.

 

खबरों के मुताबिक चमकी बुखार का डर अब दूसरी राज्य सरकारों को सता रहा है. ओडिशा में लीची के सैंपल लेकर जांच की जा रही है. राजस्थान सरकार ने चिकित्सा विभाग को पहले से ही सतर्क रहने को कहा है. झारखंड में भी सभी अस्पतालों को अलर्ट रहने को कहा गया है.

 

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