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केंद्र के हाथ लगी निराशा, रोहिंग्या मुस्लिमों को ‘सुप्रीम’ राहत

रोहिंग्या मुस्लिमनई दिल्ली। भारत सहित पूरी दुनिया के लिए बीते कई महीनों से चर्चा का विषय बने रोहिंग्या मुस्लिम पर आज यानी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

कोर्ट में शरणार्थियों की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि सुनवाई पूरी होने तक रोहिंग्या मुस्लिम को बाहर न भेजा जाए।

हिंग्या मुस्लिमों के मामले में सुनवाई के दौरान सभी पार्टियों को चर्चा के लिए समय दिया है और इस मामले की सुनवाई को 21 नवंबर तक के लिए टाल दिया है।

रोहिंग्या मुस्लिमों की याचिका सुनवाई में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा बेंच में जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल थे।

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केंद्र ने कहा है कि देशभर में 40 हजार से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी मौजूद हैं। साथ ही इन्हें देश की सुरक्षा के लिए खतरा मानती है। वहीं सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि यह मामला कार्यपालिका का है और सुप्रीम कोर्ट इसमें हस्तक्षेप न करे।

सरकार ने अपने हलफनामे में रोहिंग्या शरणार्थियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा है कि ये भारत में नहीं रह सकते। सरकार ने कहा है कि उसे खुफिया जानकारी मिली है कि कुछ रोहिंग्या आतंकी संगठनों के प्रभाव में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में दलीलें भावनात्मक पहलुओं पर नहीं, बल्कि कानूनी बिंदुओं पर आधारित होनी चाहिए।

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बेंच ने दोनों पक्षों से कहा है कि वह अपनी अर्जी में तमाम दस्तावेजों को लगाएं और साथ ही अंतरराष्ट्रीय संधियां भी इसमें समग्र तरीके से पेश करें। कोर्ट ने कहा कि वह कानून के आलोक में इस मामले की मानवीय पहलू और मानवता के आधार पर सुनवाई करेगा।

म्यांमार में हिंसा भड़कने के बाद रोहिंग्या दूसरे देशों में पलायन कर रहे हैं। अबतक करीब 9 लाख रोहिंग्या म्यांमार छोड़ चुके हैं।

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