कृषि वैज्ञानिकों ने पठारी भूमि पर सब्जी की खेती की जताई अपार संभावनाएं

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (वाराणसी) के कृषि वैज्ञानिकों ने पठारी भूमि पर सब्जी की खेती की अपार संभावनाएं जताई। संस्थान की ओर से पुरानाडीह गांव में कराए गए सूरन, हल्दी की खेती का जायजा लेते हुए किसानों को आवश्यक सुझाव दिए।

संस्थान के डायरेक्टर डा. जगदीश सिंह के दिशा निर्देश पर कृषि वैज्ञानिकों ने नक्सल प्रभावित पठारी इलाके का दौरा किया। पुरानाडीह, हेमैया, कुंडा गांव को हरी सब्जी उत्पादन के लिए चुना। धान की पैदावार न होने वाली भूमि को चिन्हित करते हुए किसानों से मिलकर हरी सब्जी उत्पादन को जागरूक किया गया। गांव के अनुसूचित जाति के किसानों को निश्शुल्क हरी सब्जी का बीज उपलब्ध कराते हुए सूरन व हल्दी की खेती करने के लिए प्रेरित किया। किसान हकड़ू प्रसाद, गोलू राम, रामाश्रय ,सर्वेश कुमार आदि किसानों ने सूरन व हल्दी की खेती अपनी भूमि में की। वर्तमान में सूरन व हल्दी की खेती लहलहा रही है। कृषि वैज्ञानिक डा. भरत राज मीना ने कीट पतंगों सहित रोग के बाबत विस्तार से जानकारी देते हुए निजात के उपाय बताए। संस्थान के प्रधान त्रिभुवन चौबे,सर्वेश कुमार मिश्रा, रामसकल, दिनेश, संतोष, श्यामनारायण आदि किसान उपस्थित थे।

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