कभी हार नही मानी साजिदा ने, अब हारने को मजबूर

“कभी हार नही मानी साजिदा ने—अब हारने को मजबूर …साजिदा के परिवार की अब आर्थिक हालत ऐसी नही है की वो अब साजिदा को आगे पड़ा सके …साजिदा और उसके परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से गुहाई लगाई है अब देखने बाली बात ये है की इस बच्ची आवाज़ उन तक जाती है या नही ………”

vlcsnap-2016-04-09-11h11m00s92कहते हैं उड़ान परों से नहीं हौसलों से होती है। इस कहावत को चरितार्थ किया है ग्राम जनैटा निवासी मौ0 हनीफ उर्फ गुलाब की बहादुर बेटी साजिदा बी ने। जिसके दोनों हाथ एक दुखद हादसे में खुदा ने उससे छीन लिये थे। लेकिन उसके बाद भी उसने जीवन से हार नहीं मानी। बल्कि पूरे आत्मविश्वास से जीवन की दुशवारियों का सामना करते हुए उन दुशवारियों को बौना साबित कर दिया।

आजकल जहाँ लोग बेटियों को बोझ समझ कर उन्हें गर्भ में ही समाप्त कराने की सोचते हैं ऐसे में साजिदा ने यह साबित कर दिया है कि बेटियां कभी माँ बाप पर बोझ नहीं होती हैं बल्कि परिवार की खुशहाली का सूत्र होती हैं। साजिदा ने भाई प्रेम की ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है कि किसी भी भाई को ऐसी बहिन पर जितना भी फक्र हो वह कम है। दरअसल उसके दोनों हाथ भाई प्रेम में ही उसके शरीर से जुदा हुए थे।

साजिदा ग्राम जनैटा निवासी मौ0 हनीफ उर्फ गुलाब तथा नसीम जहाँ की चैथे नम्बर की बिटिया है। उससे बडे शमा परवीन, गुड्डू, सोबी तथा छोटे शबाना व मुन्नी नाम के भाई बहिन और हैं। जब साजिदा कक्षा 6 में पढ़ती थी तब एक दिन उसके भाई सोबी से उसकी माँ ने जानवरों के लिये चारा काटने को कहा। किन्तु सोबी खेलने चला गया। जहाँ उसे देर हो गयी। साजिदा ने सोचा कि कहीं भाई को डाँट न पड़े लाओ चारा मैं ही काट देती हूँ। यह सोचकर वह चारा काटने लगी। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। चारा काटते समय उसके दोनों हाथ मशीन में आ गये। जिससे उसका एक हाथ कलाई के ऊपर से पूरा तथा दूसरे हाथ की सभी उंगलियां कट गयीं।

इसके बावजूद साजिद ने जिन्दगी की दुशवारियों से कभी हार नहीं मानी। आज वह पढ़ाई लिखायी, खाना बनाने, सिलाई, कढ़ाई, पेंटिंग आदि से लेकर वह सभी कार्य बिना किसी सहारे के स्वयं कर लेती है जो शायद एक पूर्णतयः स्वस्थ्य व्यक्ति भी नहीं कर पायेगा। साजिदा ने इस दुर्घटना के बाद भी छठे क्लास से आगे की अपनी पढ़ाई जारी रखी। हाई स्कूल में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने पर उसके भाई सोबी ने खुश होकर उसे चाँदी की पायलें उपहार में दीं। साजिदा ने अपनी पढ़ाई का क्रम जारी रखते हुए इण्टरमीडिएट की परीक्षा भी प्रथम श्रोणी में उत्तीर्ण की। इस बार उसके भाई सोबी ने उसे सोने के कुण्डल उपहार मंे दिये।

आजकल साजिदा एनकेबीण्मजी पीजी कालिज चन्दौसी में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है। सीमा यादव नाम की उसकी एक घनिष्ठ मित्र है। दोनों में सगी बनिों जैसा प्यार है। साजिदा पढ़ाई के अलावा अन्य एक्टीविटीज में भी सक्रियता से भाग लेते हुए अपनी प्रतिभा की छाप छोड़ती है। पिछले दिनों महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना योजना के तहत तम्बू निर्माण में साजिदा की टोली ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। साजिदा अपने कपड़े खुद सिलकर पहनती है। नहाना, कपड़े धोना कपड़े पहनना खाना खाने आदि से लेकर सभी दैनिक कार्य स्वंय बिना किसी सहायता के स्वयं करती है। उसके हौसलों एवं आत्म विश्वास का तेज उसके चेहरे पर साफ झलकता है।

इस सबके बावजूद साजिदा ने किसी भी सरकारी अथवा समाजसेवी संस्था से कभी किसी सहायता की अपील नहीं की है। न ही किसी सरकारी अथवा समाज सेवी संस्था ने बेटियों के वारे में बड़े बड़े दावे करने के बावजूद इस बेटी की कोई सुध ली है। समाज को ऐसी बहादुर बेटियों पर गर्व होना चाहिये। हम ऐसी बहादुर बेटी साजिदा के हौसलों एवं आत्म सम्मान को सलाम करते हैं।

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