एग्जिट पोल के मुताबिक सरकार नहीं बनी, तो शेयरों में आएगी भयानक गिरावट ! लगेगा लोअर सर्किट…

चुनाव के नतीजे आने में अब कुछ ही घंटे बचे है. अगर एग्जिट पोल के मुताबिक, सरकार नहीं बनी तो शेयर बाजार में ऐसी गिरावट आ सकती है, जिसमें कारोबार (ट्रेडिंग) को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा.

मतलब साफ है कि इस दौरान न तो कोई शेयर खरीद पाएगा और न कोई शेयर बेच पाएगा. ऐसे मामले को शेयर बाजार की भाषा में लोअर सर्किट कहते हैं. इस दौरान गिरावट इतनी भंयकर होती है कि कुछ ही मिनटों में लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो जाते है.

पिछले 15 साल के दौरान ऐसा सिर्फ 4 बार हुआ है. वहीं, इसके उलट शेयर बाजार में अपर सर्किट भी लगता है. ये ज्यादा तेजी के आने पर होता है.

 

आइए जानें इसके बारे में…

सर्किट दो प्रकार के होते हैं- बाजार में तेजी दर्ज करने पर अपर सर्किट और गिरावट दर्ज करने के बाद लोअर सर्किट लगाया गया था. शेयर बाजार में शेयरों की खरीद-फरोख्त के दौरान किसी भयावह स्थिति के उत्पन्न हो जाने पर नियंत्रण पाने के लिए सर्किट लगाया जाता है.

यह रेगुलेटर SEBI की तरफ से बनाई गई प्राइस लिमिट होती है. इससे यह तय होता है कि एनएसई या बीएसई के निफ्टी और सेंसेक्स जैसे इंडेक्स एक दिन में कितना ऊपर-नीचे जा सकते हैं. फिल्टर 10 फीसदी, 15 फीसदी और 20 फीसदी के उछाल या गिरावट पर लगता है.

इसके बाद कूलिंग ऑफ पीरियड होता है. मिसाल के लिए, अगर 10 फीसदी की सर्किट लिमिट 1 बजे दोपहर से पहले ब्रेक होती है तो ट्रेडिंग अपने आप रुक जाएगी और वह एक घंटे बाद फिर शुरू होगी. इंडेक्स 20 के फीसदी गिरने पर ट्रेडिंग बाकी दिन के लिए भी रोक दी जाती है.

 

चुनाव नतीजे के दिन कब लग सकता है सर्किट

एनएसई के प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी अगर एक बजे से पहले 10 फीसदी गिरकर 10,564 के स्तर पर आ जाता है तब निफ्टी में 45 मिनट के लिए कारोबार बंद हो जाएगा.>> वहीं, दोपहर को 1 से 2:30 के बीच भी 10 फीसदी की गिरावट के 15 मिनट के लिए कारोबार बंद हो जाएगा.

अगर 2:30 बजे के बाद निफ्टी 10 फीसदी गिरता है तो इंडेक्स में लोअर सर्किट नहीं लगेगा

इस तरह निफ्टी के 15 फीसदी गिरने पर 1:45 बजे तक लोअर सर्किट लगेगा. मतलब कारोबार बंद हो जाएग.

दोपहर को 1 से 2:30 के बीच भी 15 फीसदी की गिरावट के 45 मिनट के लिए कारोबार बंद हो जाएगा.

अगर 2:30 बजे के बाद निफ्टी 15 फीसदी गिरता है तो कारोबार पूरी तरह उसी समय बंद हो जाएगा.

अगर दिन के कारोबार कभी भी 20 फीसदी की गिरावट आती है तो उसी समय से दिनभर के लिए कारोबार बंद हो जाएगा.

इससे पहले  जनवरी 2008 की आर्थिक मंदी में लोअर सर्किट लगा था. इससे पहले मई 2006 अतिरिक्त मार्जिन की मांग की वजह से एक बार लोअर सर्किट लग चुका है. वहीं, मई 2004 अटल सरकार गिरने पर भी लोअर सर्किट लग चुका है.

 

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बाज़ार में ऊपरी सर्किट चुनाव नतीजे के दिन कब लगेगा-

इसका मतलब है कि अगर निफ्टी में 23 मई को अचानक 10 फीसदी की तेजी के साथ 12880 के स्तर पर पहुंच जाए तो कारोबार बंद हो जाएगा. इसके बाद 15 फीसदी बढ़कर 13465.45 के स्तर पर पहुंचने पर दूसरा सर्किट लगेगा.

इसी तरह से 20 फीसदी की तेजी के बाद निफ्टी में ऊपरी सर्किट 14,050.9 के स्तर पर लगेगा.

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव में यूपीए की जीत पर 18 मई 2009 को निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने 20 फीसदी का अपर सर्किट ब्रेक किया था.

इसका मकसद क्या है- फिल्टर या सर्किट ब्रेकर का मकसद मार्केट पार्टिसिपेंट्स को संभलने का वक्त देकर बाजार में अफरातफरी मचने से रोकना है. जिस वक्त कैश सेगमेंट में सर्किट फिल्टर लगता है, उसी समय ट्रेडिंग रुक जाती है.

इंडेक्स फ्यूचर्स में ट्रेडिंग अपने आप नहीं रुकती बल्कि कैश सेगमेंट में ट्रेडिंग बंद होने के बाद यहां भी ट्रेडिंग रोकनी पड़ती है.

 

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