उत्तराखंड सीएम रावत पहुंचे सुप्रीम कोर्ट,भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई जांच के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सीएम रावत ने हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है जिसमें उच्‍च न्‍यायालय ने भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपी है।

गौरतलब है कि नैनीताल हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लाभ पहुंचाने के लिए नोटबंदी के बाद एक दंपती के बैंक खाते में धन जमा कराए जाने संबंधी सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। यही नहीं उच्‍च न्‍यायालय ने आरोप लगाने वाले पत्रकार के खिलाफ इस बारे में दर्ज प्राथमिकी भी रद कर दी थी।

उत्‍तराखंड हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता उमेश शर्मा के खिलाफ देहरादून के एक थाने में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का आदेश देते हुए उनसे मामले से जुड़े सभी दस्तावेज बुधवार तक अदालत में जमा कराने के निर्देश दिए थे। शर्मा ने अदालत से अपने खिलाफ देहरादून में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की गुहार लगाई थी।

उमेश शर्मा ने इस साल 24 जून को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली थी। इस पोस्‍ट में दावा किया गया था कि झारखंड के अमृतेश चौहान ने नोटबंदी के बाद कथित तौर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के निजी लाभ के लिए एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर और उनकी पत्नी के खाते में पैसे जमा कराए थे। यही नहीं पोस्‍ट में बैंक खाते में हुए लेन-देन का विवरण भी डाला गया था।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने शर्मा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद करने का आदेश दिया था। साथ ही उनके आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। अदालत ने यह भी कहा था कि मामला गंभीर है इसलिए इसकी जांच होनी जरूरी है।

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