अब IIT कानपुर बताएगा-गंगा, सिंधु और ब्रह्मïपुत्र समेत विभिन्न नदियों की गोद में किस स्रोत से कितना जल हो रहा प्रवाहित

अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर बताएगा कि गंगा, सिंधु और ब्रह्मïपुत्र समेत विभिन्न नदियों की गोद में किस स्रोत से कितना जल प्रवाहित हो रहा है। संस्थान के अर्थ साइंस विभाग के विशेषज्ञों ने यह जानने के लिए आइसोटोप मिङ्क्षक्सग मॉडल बनाया है। इस मॉडल से नदियों में पानी के मूल स्रोत यानी ग्लेशियर, भू-जल और वर्षा जल की मात्रा पता की जा सकती है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने हिमालय से निकलने वाली सिंधु, गंगा और ब्रह्मïपुत्र नदी के जल पर दो साल तक इस मॉडल के अनुसार शोध किया।

गंगा में ग्लेशियर पिघलने से जल की मात्रा अधिक

शोध के अनुसार सिंधु में ग्लेशियर पिघलने से बने पानी की मात्रा अधिक है तो ब्रह्मïपुत्र में वर्षा जल की। गंगा नदी में ग्लेशियर पिघलने से मिले जल की मात्रा अधिक है। सिंधु के मूल जल में प्रति वर्ष 14 गीगा टन (एक गीगा टन यानी एक अरब टन), ब्रह्मपुत्र में 11 और गंगा में नौ गीगा टन ग्लेशियर की पिघली बर्फ का जल है। गंगाजल में 43 फीसद ग्लेशियर, 34 फीसद वर्षा और 23 फीसद भू-जल की हिस्सेदारी है। यह शोध अप्रैल माह में जियो केमिकल पर्सपेक्टिव लेटर्स जर्नल में प्रकाशित भी हुआ है।

अलग-अलग स्थानों से लिया गया जल का नमूना

अर्थ साइंस विभाग के प्रो. इंद्रशेखर सेन और शोधार्थी सौमिता बोरल ने हाइड्रोजन और ऑक्सीजन आइसोटोप मिक्सिंग मॉडल बनाया। गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदी के जल का अलग-अलग स्थानों से नमूना लिया। रिमोट सेंङ्क्षसग डेटा और मैथेमेटिकल मॉडलिंग से गणना की। प्रो. सेन के मुताबिक आइसोटोप मिक्सिंग मॉडल से किसी भी पानी का मूल स्रोत बताया जा सकता है। इस शोध में मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस ने भी सहयोग किया है।

इससे ये होगा लाभ

प्रो. इंद्रशेखर के अनुसार, इस मॉडल के जरिए अध्ययन से मिले डेटा से ग्लेशियर की संभावित उम्र, बाढ़ की आशंका, नदी में जल कम होने का कारण पता कर सकते हैं। चूंकि जल विद्युत परियोजना में जल की मात्रा के अनुसार बने टरबाइन ही अच्छे परिणाम देते हैं, इसलिए मात्रा और प्रवाह का पूर्वानुमान भी जरूरी है।

बर्फ की मात्रा गीगा टन में

नदी     मात्रा

गंगा   09

ब्रह्मपुत्र  11

सिंधु 14

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