अख्तर हत्या कांड और अनसुलझे सवाल

अख्तर हत्या कांड और अनसुलझे सवाल
– जिस मकान में पुलिस छापा मारने गई थी वह मकान खाली था ।
– अगर मकान में बदमाश थे तो उन्हें पूरी आबादी में किसी ने भागते हुए क्यों नहीं देखा ,
-अख्तर कोट चौकी पुलिस प्रभारी थे उन्हें दाबिश में क्यों ले जाया गया।
– अगर जावेद जैसे खूंखार को पकडना था तो बिना बुलेट प्रूफ जैकेट के मात्र 12 पुलिस वाले क्यों गए ।
-पुलिस टीम में इंस्पेक्टर भी शामिल थे फिर उनसे लीड क्यों करवाया गया।
-बदमाशों ने गोली चलाई तो एनकाउंटर अटैक क्यों नहीं किया गया।
-अख्तर को गोली पीछे से लगी जबकि बदमाश उनके सामने थे।
-इंस्पेक्टर यादव और अख्तर के बीच किस बात को लेकर विवाद चल रहा था।इंसपेक्टर के पैंट पर खून के छींटे कैसे लगे वह किस पोजीशन पर थे ।
– अख्तर को छोड कर किसी को खरोंच भी नहीं आयी यह कैसा मुठभेड़ था ।
– बाकी 11 पुलिस कर्मियों की टीम मौके से क्यों चली गई और एक घंटे बाद दोबारा लौटी ।परिजनों का आरोप
-जब टीम में इंस्पेक्टर रैंक के लोग शामिल थे तो दरोगा को क्यों आगे किया गया।
-अख्तर के पिता बाबू खान ने आरोप लगाया कि यदि गोली बदमाशों ने मारी होती तो वह सामने से लगी होती ।
-लेकिन अख्तर को गोली पीछे से लगी है। 11 पुलिस वाले मुठभेड़ में गए थे तो गोली चलते ही सभी क्यों भाग गए।एक घंटे बाद वापस आई पुलिस
– मुठभेड़ के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि जिस घर में दबिश दी गई वहां कोई नहीं था।
-गोली की आवाज सुनकर वह सभी बाहर निकले।
-पुलिस वाले भागते नजर आए लेकिन उस मकान से बाकी कोई नहीं निकला ।करीब 1 घंटे बाद पुलिस वाले वापस आए और अख्तर को लेकर चले गए।
सीबीआई जांच की मांग ………
परिजनों ने मामले की जांच सीबीआई से कराने को कहा है।उन्होंने कहा कि यह मुठभेड़ नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से की गई हत्या है।ऐसे में पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। वहीं, आईजी मेरठ सुजीत पांडे ने मामले की जांच डीआईजी लक्ष्मी सिंह को दी है।

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