U -19 एशिया कप का हीरो बना एक बस कंडक्टर माँ का बेटा , जाने इसके बारे में पूरा इतिहास…

भारत के युवा पर गर्व हैं की वो अपने हुनर से काफी आगे निकल रहे हैं. चाहे सोशल मीडिया के किसी प्लेटफ्रॉम में हो. युवा पीढ़ी आगे निकल रही अहिं. वहीं ऐसे ही एक खबर सामने आई हैं जिसे सुनकर सबके चेहरे पर ख़ुशी छा गई हैं.

 

 

 

खबरों के मुताबिक भारत के एक युवा क्रिकेटर की कामयाबी के पीछे उसकी मां के संघर्ष की भी कहानी है. 18 वर्षीय बोलिंग ऑलराउंडर अथर्व अंकोलेकर ने हाल में अंडर 19 एशिया कप भारत को जिताने में अहम भूमिका निभाई. भारत ने सातवीं बार ये खिताब जीता.

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वहीं फाइनल में बांग्लादेश को महज़ 106 रन बनाने थे लेकिन अथर्व की फिरकी ने कमाल दिखाया. अथर्व के शानदार लेफ्ट आर्म स्पिन स्पैल (28 रन देकर 5 विकेट) के सामने बांग्लादेश टिक ना सका और 101 पर ही उसका पुलिंदा बंध गया.

अथर्व की सफलता की कहानी उसकी मां वैदेही की संघर्ष-गाथा के जिक्र के बिना पूरी नहीं हो सकती. अथर्व के पिता के देहांत के बाद वैदेही ने बड़ी मुश्किलों से अथर्व और उसके छोटे भाई की परवरिश की. अथर्व के पिता मुंबई पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस BEST में कंडक्टर थे. उनके निधन के बाद अथर्व की मां को उनके स्थान पर कंडक्टर की नौकरी मिली. एक मां के पास इसे स्वीकार करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था. आखिर उसे अपने दो बेटों को पालने के लिए ऐसा करना ज़रूरी था.

जहां उसके पिता कंडक्टर की नौकरी करने के साथ पार्ट टाइम क्लब क्रिकेटर भी थे. अथर्व ने बताया, ‘मेरे पिता का सपना था कि मैं बड़ा होकर भारत के लिए खेलूं, मैं खुश हूं कि मैं अभी यहां तक पहुंच सका.’

दरअसल अथर्व की एशिया कप में कामयाबी के बाद उनके ऐसे कई रिश्तेदारों ने भी बधाई देना शुरू कर दिया, जिन्होंने उनके पिता के देहांत के बाद अथर्व की मां को उनके हाल पर छोड़ दिया था. एशिया कप से वापसी के बाद मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अथर्व के स्वागत के लिए 50 से ज्यादा दोस्त और रिश्तेदार मौजूद थे.

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