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धीरे-धीरे आपके दिमाग को खा जाती है ये बीमारी, मुफ्त में मिलती है मौत

ब्रेन ट्यूमर ऐसी भायनक बीमारी है जिसका नाम सुनते ही लोगों के पांव तले जमीन खिसक जाती है। यह बीमारी आज भी चिंता का विषय बनी हुई है। इस बीमारी में रोगियों के जीवित रहने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। इसलिए ये बहुत जरूरी है कि आजकल के यूथ को इसकी सही और पूरी जानकारी हो।

ब्रेन ट्यूमर

ब्रेन ट्यूमर क्या है ?

ब्रेन ट्यूमर दिमाग में असामन्य कोशिकाओं का इकठ्ठा होना है। जब ये कोशिकाएं तेजी से बढ़ती जाती है तो शरीर के लिए घातक बनती जाती हैं। ये कोशिकाएं बड़ी होकर एक गांठ का रूप ले लेती हैं। ब्रेन ट्यूमर दो तरह का होता है। एक कैंसरजन्य जिसे मैलिग्नेंट भी कहते हैं और दूसरा कैंसर रहित जिसे बिनाइन भी कहते हैं। जब मैलिग्नेंट ट्यूमर बढ़ते हैं, तो वे आपकी खोपड़ी के अंदर दबाव बढ़ा सकते हैं, ये मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकते हैं और ये जीवन को खतरे में डाल सकते हैं। ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है।

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लक्षण-

सर में तेज दर्द होता है, यह दर्द सुबह के समय सबसे तेज होता है।

शरीर में दिन भर कमजोरी का बना रहना।

जी मिचलाना और उल्टी की समस्या हो सकती है।

शरीर का संतुलन साधने में दिक्कत।

देखने और सुनने में कठिनाई होना।

कैसे करें बीमारी का पता

ब्रेन ट्यूमर की बीमारी का पता करने के लिए सबसे पहले शारीरिक परीक्षण किया जाता है। यह जानने के लिए डॉक्टर एक परीक्षण करते हैं। इस परीक्षण में यह देखा जाता है कि आपके क्रैनियल नर्व सही हैं या नहीं। यही वो नर्व है जो आपके दिमाग से विकसित होती है। शारीरिक परीक्षण के बाद रोग का पता चलता है। सीटी स्कैन, एमआरआई, एंजियोग्राफी या सिर की बॉयोप्सी की जा सकती है।

उपचार

ब्रेन ट्यूमर का इलाज सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी जैसे पारंपरिक तरीकों का उपयोग करके किया जाता रहा है, लेकिन ओपन ब्रेन सर्जरी से मस्तिष्क में अंदरूनी रक्तस्राव, याद्दाश्त में कमी या संक्रमण जैसे कई खतरे भी सामने आते थे। यहां तक कि थोड़ी सी त्रुटि के भी गंभीर परिणाम हो सकते हैं और स्थायी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

न्यूरोनेविगेशन से सर्जरी

इन दिनों डायग्नोसिस और इलाज के अत्याधुनिक तरीकों की बदौलत ब्रेन ट्यूमर को हटाना और रोगी के जीवन काल को बढ़ाना संभव हो चुका है। न्यूरोनेविगेशन तकनीक सर्जन को मस्तिष्क में ट्यूमर को हटाने में कहीं ज्यादा सक्षम बनाती है। यह तकनीक जीपीएस के समान है। यह एक कंप्यूटर आधारित प्रोग्राम है जो कंप्यूटर सिस्टम पर एमआरआई और सीटी स्कैन की छवियों को दर्ज करता है। एक बार जब सूचना को एक विशेष वर्क-स्टेशन में फीड कर दिया जाता है, तब सिस्टम एमआरआई छवियों के साथ-साथ ऑपरेटिंग रूम में रोगी के नाक और भौंह जैसे बाहरी क्षेत्रों के विकारों को पहचानने का काम करता है और आंकड़ों को दो सेट में मिलान करता है।

इस तकनीक से सर्जन्स को सटीक चीरा लगाने में मदद मिलती है, जिससे सिर से पूरी तरह से बाल हटाने की जरूरत नहीं पड़ती। न्यूरोनेविगेशन का मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की सर्जरी के दौरान धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है।

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सही समय पर हो रोग का निदान 

कैंसरयुक्त ट्यूमर को उसके विकसित होने के तरीके के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा जाता है।

जो ट्यूमर सीधे दिमाग में पैदा होते हैं, उन्हें प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। ये ट्यूमर ज्यादातर युवाओं में देखने को मिलेगा।

जो ट्यूमर शरीर के बाकी भाग से फैलता है उसे सेकंडरी या मेटास्टैटिक ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। इस मेलिग्नेंट ट्यूमर(कैंसर सेल्स से निर्मित) के मामले में रोगी का एडवांस कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और सर्जिकल तकनीकों की मदद से इलाज किया जाता है। इससे रोगी की तीन साल तक उम्र बढ़ सकती है।

इसके अलावा बिनाइन य कैंसर रहित ट्यूमर होते हैं, जो आमतौर पर बुजुर्गों में पाए जाते हैं और इसका इलाज ट्यूमर के आकार को देखकर किया जाता है। इसके इलाज में सर्जरी या फिर गामानाइफ का सहारा लिया जाता है। अगर रोगी के ब्रेन ट्यूमर का जल्द पता चल जाता है,तो दवाओं व आधुनिक थेरेपी जैसे माइक्रोसर्जरी, इमेज गाइडेड सर्जरी, एंडोस्कोपिक सर्जरी और रेडियोथेरेपी से भी बीमारी को ठीक करने की कोशिश की जाती है।

 

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