Tag Archives: प्रेरक प्रसंग

प्रेरक प्रसंग – ‘नजरिया बदलें, मिलेगी कामयाबी’

प्रेरक प्रसंग

एक लड़के के मन में नई – नई बातों को जानने की जिज्ञासा रहती थी | वह हमेशा लोगों से कुछ न कुछ पूछता रहता था | वह जहाँ रहता था , वाही पास में ही एक मास्टर जी भी रहते थे | एक दिन वह मास्टर जी के पास ...

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प्रेरक-प्रसंग: नजरिया बदले

नजरिया बदले

काफी समय पहले की बात है। दो युवक कहीं जा रहे थे कि तभी उन्हें थकान लगने लगी और धूप ज्यादा होने की वजह से वह थकान और बढ़ गई। उन्होंने देखा कि पास एक बड़ा सा पेड़ है। दोनों उस पेड़ के पास गए और वहां आराम करने लगे। ...

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प्रेरक-प्रसंग: ये कहानी सिखाती है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती

मेहनत कभी बेकार नहीं जाती

जिंदगी में किया गया कोई भी काम या मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। हम जितनी मेहनत करते है उसका प्रतिफल हमें किसी न किसी रूप में अवश्य मिलता है, यही सत्य है। फर्क केवल इतना है कि कुछ व्यक्ति इस बात पर विश्वास करते है कि “मेहनत कभी बेकार नहीं ...

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प्रेरक-प्रसंग : बुद्धि का बल

बुद्धि का बल

विश्व के महानतम दार्शनिकों में से एक सुकरात एक बार अपने शिष्यों के साथ बैठे कुछ चर्चा कर रहे थे। तभी वहां एक ज्योतिषी आ पहुंचा। वह सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए बोला, “मैं ज्ञानी हूँ ,मैं किसी का चेहरा देखकर उसका चरित्र बता सकता हूँ। बताओ तुममें ...

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प्रेरक-प्रसंग: सच्चा प्यार

सच्चा प्यार

एक बार की बात है कि एक लड़की ने एक बुजुर्ग से पूछा कि मैंने सुना है कि सच्चा प्यार कम ही लोगों को नसीब होता है। ऐसा क्यों होता है? क्या यह बात सच है? बुजुर्ग ने कहा कि मैं बताता हूं, लेकिन पहले तुम एक काम करो। कल ...

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प्रेरक-प्रसंग: अगर आपके विचार भी नहीं छिपते तो ये कहानी आप ही के लिए है

प्रेरक-प्रसंग

महाभारत के समय की बात है। पांडव स्वयंवर में दी गई शर्त को जीत चुके थे। शर्त के अनुसार द्रौपदी स्वयंवर अर्जुन के साथ हो गया। इसके बाद पांडव द्रौपदी को साथ लेकर अपनी कुटिया में आ गए। पांडव उस समय अज्ञातवास में थे। एक ब्रह्माण द्वारा स्वयंवर में विजयी ...

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प्रेरक-प्रसंग : सहनशीलता

सहनशीलता

एक दरोगा संत दादू की ईश्वर भक्ति और सिद्धि से बहुत प्रभावित था। उन्हें गुरु मानने की इच्छा से वह उनकी खोज में निकल पड़ा। लगभग आधा जंगल पार करने के बाद दरोगा को केवल धोती पहने एक साधारण-सा व्यक्ति दिखाई दिया। वह उसके पास जाकर बोला, “क्यों बे तुझे ...

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प्रेरक-प्रसंग : बुरी संगति

बुरी संगति

पुराने समय की बात है। एक राज्य में एक राजा था। किसी कारण से वह अन्य गाँव में जाना चाहता था। एक दिन वह धनुष-बाण सहित पैदल ही चल पड़ा। चलते-चलते राजा थक गया। अत: वह बीच रास्ते में ही एक विशाल पेड़ के नीचे बैठ गया। राजा अपने धनुष-बाण ...

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प्रेरक-प्रसंग : राजा की चतुराई

राजा की चतुराई

वजीर के अवकाश लेने के बाद बादशाह ने वजीर के रिक्त पद पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवार बुलवाए। कठिन परीक्षा से गुज़र कर तीन उम्मीदवार योग्य पाए गए। तीनों उम्मीदवारों से बादशाह ने एक-एक कर एक ही सवाल किया, ‘मान लो मेरी और तुम्हारी दाढ़ी में एकसाथ आग लग जाए ...

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प्रेरक-प्रसंग : दिलों में दूरियां

दिलों में दूरियां

एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। अचानक उन्होंने सभी शिष्यों से एक सवाल पूछा। बताओ जब दो लोग एक दूसरे पर गुस्सा करते हैं तो जोर-जोर से चिल्लाते क्यों हैं? शिष्यों ने कुछ देर सोचा और एक ने उत्तर दिया : हम अपनी शांति खो चुके ...

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