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अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक का बड़ा खुलासा: केंद्र सरकार ने दिया लिखित आश्वासन

गुरुग्राम/नई दिल्ली: पिछले 26 दिनों से जारी आमरण अनशन को आखिरकार समाप्त करने के बाद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को एक वीडियो संदेश जारी कर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही, नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक और व्यापक परीक्षा सुधारों पर संसद में चर्चा कराने का लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही उन्होंने अपना अनशन वापस लिया है।

इसके साथ ही सरकार ने यह लिखित वचनबद्धता भी दी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी कानूनी मामला या एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।

कड़े मोलभाव के बाद मिला लिखित आश्वासन

अपने अनशन के समापन के ठीक बाद रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि वह सरकार से केवल मौखिक बातों के बजाय लिखित आश्वासन पाने पर अड़े हुए थे। इसी वजह से पिछले दो दिनों से सरकार के प्रतिनिधियों के साथ कड़े मोलभाव का दौर चल रहा था, जिसके चलते उनका अनशन दो दिन और खिंच गया। आखिरकार, सरकार द्वारा लिखित रूप में अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करने के बाद उन्होंने अपना अनशन तोड़ा। सरकार के लिखित पत्र को पढ़ते हुए वांगचुक ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार 20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च में भाग लेने वाले और शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वाले छात्रों व नागरिकों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज न करने पर सकारात्मक रुख अपना रही है। इसके अतिरिक्त, हालिया नीट पेपर लीक विवाद से आहत होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार कर रही है।

केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी और पीएम मोदी की प्रतिक्रिया

उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई की आधी रात को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अपना 26 दिनों का लंबा अनशन समाप्त किया था। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे। केंद्रीय मंत्रियों ने वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया, जबकि उनकी पत्नी गीतांजलि एंग्मो भी इस भावुक पल में उनके साथ उपस्थित थीं।

वांगचुक ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने भी उनसे अनशन वापस लेने की अपील की थी और भरोसा दिलाया था कि इस मुद्दे को संसद में पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा। वांगचुक द्वारा अनशन समाप्त किए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की और उनसे डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हुए जल्द से जल्द अपना वजन और स्वास्थ्य वापस हासिल करने का आग्रह किया।

कॉकरोच जनता पार्टी का रुख और आगे का आंदोलन

दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के फैसले का स्वागत करते हुए राहत और आभार व्यक्त किया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के असाधारण साहस और बलिदान की सराहना करते हुए कहा कि अपनी जान जोखिम में डालकर उन्होंने पूरे देश की चेतना को जगाने का काम किया है।

हालांकि, सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक जंतर-मंतर पर उनका शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के अलावा सीजेपी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में अनियमितताओं की जवाबदेही तय करने, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, मृतक छात्रों के परिजनों के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमों को वापस लेने की मांग पर अड़ी हुई है।

जंतर-मंतर से मेदांता अस्पताल तक का सफर

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक 28 जून को जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन में शामिल हुए थे और परीक्षा धांधली के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। इस 26 दिनों के अनशन के दौरान उनका वजन करीब 11 किलोग्राम घट गया था। 18 जुलाई को स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। इसके बाद उनकी पत्नी गीतांजलि एंग्मो ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसके बाद अदालत ने उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी थी। मेदांता में इलाज के दौरान भी वांगचुक ने कहा था कि वे जल्द अपने छात्रों के बीच लौटकर पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित होने तक वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे।

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