
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर भाजपा के लिए काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केवल भाजपा सदस्यों को ही मतदाता के रूप में पंजीकृत किया जा रहा है। चुनाव आयोग केवल भाजपा सदस्यों को ही भारत का नागरिक मान रहा है। आयोग और प्रशासन के सहयोग से भाजपा कार्यकर्ता बड़े पैमाने पर धांधली कर रहे हैं।
गुरुवार को समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने भाजपा की 10 चुनावी रणनीतियों का ब्योरा दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा की रणनीतियों में फर्जी वोट डलवाना, विरोधियों के वोट हटवाना, मतदान के दिन बंदूकें तानना, ईवीएम में छेड़छाड़, मतगणना में हेराफेरी, हारे हुए उम्मीदवार को जीत का प्रमाण पत्र जारी करना, विपक्ष में फूट डालना और विपक्ष को तोड़कर सरकार बनाना शामिल है।
अखिलेश ने कहा कि जब भाजपा जनता के बीच कमजोर या पिछड़ती नजर आती है, तो वह चुनाव आयोग की आड़ लेती है। ये दोनों मिलकर संविधान और जनता को धोखा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2022 से ही वह बार-बार आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। प्रशासन के सहयोग से बड़े पैमाने पर घोटाले की साजिश रची जा रही है।
सपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के भीतर कथित हेरफेर के प्रयासों को रोकने के लिए काम किया था। सरोजिनी नगर में दशरथ के नाम पर 100 से अधिक फॉर्म भरे गए थे। चुनाव आयोग को यह स्वीकार करना पड़ा कि शिकायत वैध थी। सुल्तानपुर में, नंदलाल का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल करते हुए आवेदन जमा किए गए थे।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि अब तक पहचाने गए 16 लाख फर्जी मतदाताओं के अलावा तीन लाख और फर्जी मतदाताओं का पता चला है। इससे फर्जी मतदाताओं की कुल संख्या 19 लाख हो गई है। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक फर्जी मतदाता लोनी में 15,000 और साहिबाबाद में 13,000 हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा अनियमितताएं उन जगहों पर हो रही हैं जहां भाजपा को लग रहा था कि वह चुनाव हार रही है। सपा मुरादाबाद से 722 वोटों से हार गई थी। इसलिए, वहां अब तक 8,000 फर्जी मतदाता जोड़े जा चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि फर्जी मतदाता उन जगहों पर जोड़े जा रहे हैं जहां भाजपा की हार निश्चित दिख रही है।



