
नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने अब तक 46 लोगों की जान ले ली है और नदी के किनारे बसे इलाकों में व्यापक तबाही मचाई है। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ से कम से कम एक दर्जन पनबिजली परियोजनाएं भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से आ रहा था इस आपदा से तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और धाडिंग जिले, साथ ही काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नुवाकोट जिला भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल सेना ने एक बयान में कहा कि नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि के कारण रसुवा जिले के तिमुरे और पास के स्याफ्रुबेसी क्षेत्र में व्यापक क्षति हुई है, जिसमें वाहन, सामान और अन्य संपत्ति बह गई है। रसुवा जिला काठमांडू के उत्तर-पूर्व में, तिब्बत सीमा से लगभग 125 किलोमीटर दूर स्थित है।
इस बीच, नेपाल पर्यटन बोर्ड (एनटीबी) ने बताया कि रसुवा में आई बाढ़ के बाद 384 यात्री लापता हो गए हैं, जिनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी यात्रियों में 105 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय (एनआरआई) हैं, जबकि शेष पर्यटक अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड सहित अन्य देशों से हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने सहायता के लिए आपातकालीन संपर्क नंबर जारी किए हैं: 1234 (टोल-फ्री), 1144 (हॉटलाइन) और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445।
नेपाल में अचानक आई बाढ़ के मद्देनजर राहत कार्यों के लिए भारतीय वायु सेना ने अपने परिवहन विमानों के बेड़े, जिनमें सी-17, सी-130जे और सी-295 शामिल हैं, को तैयार रखा है। सूत्रों के अनुसार, एक सी-130जे परिवहन विमान आज देर शाम तक राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हो गया है। उधर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तिब्बत में चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र के पास के गांवों और कस्बों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए व्यापक प्रयास शुरू करने का आदेश दे दिया है।




