
नेपाल के रसुवा जिले और मध्य क्षेत्र के अन्य हिस्सों में आई विनाशकारी बाढ़ में कम से कम 616 लोगों की मौत हो गई है। नेपाली पुलिस ने आपदा के तीन दिन बाद शनिवार को यह जानकारी दी। चीनी सरकारी मीडिया ने अलग से सात मौतों की सूचना दी है, जिससे कुल मृतकों की संख्या कम से कम 623 हो गई है, जबकि लगभग 2,000 लोग अभी भी लापता हैं। बचाव और राहत कार्यों में तेजी आने के साथ ही, स्थानीय अधिकारियों की सहायता के लिए 11 सदस्यीय भारतीय दल शनिवार को नेपाल पहुंचा। नेपाली सरकार के अनुरोध पर भेजे गए इस दल में चिकित्सा कर्मी और सुरंग बचाव विशेषज्ञ शामिल हैं और यह सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्यों में सहयोग करेगा।
मध्य नेपाल में तबाही का मंजर, 2,500 से अधिक लापता लोगों की तलाश जारी
रासुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में आई बाढ़ ने 600 से अधिक लोगों की जान ले ली और घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत अवसंरचना को व्यापक नुकसान पहुंचाया। नेपाल और तिब्बत (जहां से इस आपदा का उद्गम स्थल है) में भी लगभग 2,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल दुर्गम भूभाग और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के बीच प्रभावित क्षेत्रों में खोज जारी रखे हुए हैं।
अचानक आई बाढ़ का कारण क्या था?
26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ मुख्य रूप से हिमालय में अचानक हिमखंड के ढहने के कारण हुई थी, न कि सामान्य मानसूनी बारिश के कारण। नेपाल-चीन सीमा के पास हिमखंड और चट्टान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे लेंडे खोला नदी में बर्फ और चट्टानों का एक विशाल हिमस्खलन हुआ। पानी, बर्फ, चट्टानों और मलबे का अचानक प्रवाह भोटे कोशी नदी में चला गया, जिससे एक शक्तिशाली बाढ़ आई जिसने रसुवा जिले और निचले इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भूस्खलन के कारण अस्थायी अवरोध और नई झीलें भी बन गईं। मलबे से बनी ऐसी ही एक झील के प्राकृतिक अवरोध के टूटने पर एक और बाढ़ आने की आशंका जताई गई।




