Mirzapur में बरसात के कारण मकान का छज्जा गिरने से तीन लोगों की हो गई मौत

पूर्वांचल में रात से हो रही बारिश से एक तरफ किसान खुश दिख रहे हैं कि खरीफ की फसल से पूर्व खेतों की जोताई हो जाएगी वहीं दूसरी तरफ मीरजापुर में बरसात के कारण मकान का छज्जा गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं दर्जनों कच्‍चे मकान भी ढह गए। चंदौली में भी बारिश ने रेल व नगर प्रशासन की पोल खोल दी। जगह-जगह जलजमाव हो गया और लोगों का अवागमन बाधित हो गया।

मीरजापुर के लालगंज क्षेत्र के बरौंधा में बारिश के कारण मकान का छज्जा (बरजा) गिर जाने के कारण उसके नीचे बैठे बिलकिस (55) पत्नी मोहम्मद हारुन, मुन्नी (50) पुत्री गुलहसन की मौके पर ही मौत हो गई। हिना (24) पलक (17), फरीन (16) जैद (15), बानिया (02) गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से भी एक और की मौत इलाज के दौरान हो चुकी है। पूरा परिवार तीन शेड के नीचे ही था और देर रात हुई बारिश में तीन शेड सहित बारजा ढह गया और सभी उसमें दब गया। चीख पुकार सुन आसपास के लोग पहुंचे और घायलों को बाहर निकाला गया। मौके पर सीओ लालगंज सहित पुलिस टीम ने सभी को स्वस्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया। दो लोगों मंडलीय अस्पताल रेफर किया गया है।

मीरजापुर में मौसम विभाग को भी इसका अनुमान नहीं था बारिश 10 एमएम से ज्यादा होगी। लेकिन रात करीब 10 बजे बारिश शुरू हुई तो सुबह साढ़े पांच बजे तक बूंदे नहीं टूटी। केंद्रीय जल आयोग के अवर अभियंता रविशंकर सिंह ने बताया कि जिले में 15 से 20 एमएम तक बारिश हुई है। इसका नतीजा हर तरफ जल ही जल दिख रहा है। लालगंज में हो रहे फोरलेन निर्माण के काम की वजह से हालात काफी खराब हो गए। हलिया क्षेत्र में भी खेतों में हाथ भर तक पानी भर गया। रपटे और जंगली नाले, तालाबों में भी पानी भर गया। चील्ह क्षेत्र में रास्ते डूब गए वहीं जमुआ में पानी निकासी की समस्या से लोगों का आना जाना दूभर हो गया। चुनार, मड़िहान, राजगढ़, सीखड़ सभी क्षेत्रों में ताल तलैया जलमग्न हो गए। शुक्रवार सुबह लोगों की नींद मेंढकों की टर्र-टर्र से खुली।

चंदौली में बारिश ने जिम्मेदारों की पोल खोल दी। पीडीडीयू नगर रेल कालोनी से लगाए कोतवाली परिसर व अमोघपुर प्राथमिक विद्यालय में पानी जमा हो गया है। रात भर हुई बारिश के बाद लोग अपने घरों में लगे पानी को बाल्टी से बाहर निकाल रहे हैं। कायदे से नालों की साफ सफाई हुई होती तो ऐसी स्थिति नहीं आती।

वहीं बलिया में  किसान खुश हैं कि खरीफ की फसल से पूर्व खेतो की जोताई हो जाएगी और खरपतवार समाप्त हो जाएंगें। इस बारिश में जो किसान धान की नर्सरी लगा दिए हैं उनकी हल्की सिचाई हो गई है और जिन्होंने  अभी धान की नर्सरी नहीं डाला है उसके लिए खेतो की तैयारी के लिए यह बरसात सोने पर सुहागा हो गया है।

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