
उत्तराखंड में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट के बीच भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा और अप्रत्याशित राजनीतिक झटका लगा है। मशहूर पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल के पिता और वरिष्ठ नेता रामशरण नौटियाल ने मंगलवार को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
जौनसार-बावर क्षेत्र में खासा राजनीतिक प्रभाव रखने वाले रामशरण नौटियाल के इस कदम ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। हालांकि, उन्होंने पार्टी छोड़ने की कोई स्पष्ट वजह आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन राजनीतिक जानकारों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्थानीय नेताओं के साथ उनकी लंबे समय से चल रही खींचतान और असहयोगात्मक रवैया इस नाराजगी का मुख्य कारण माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने अब तक उनके इस्तीफे की किसी भी औपचारिक सूचना मिलने से अनभिज्ञता जताई है।
रामशरण नौटियाल का राजनीतिक सफर और भाजपा के साथ उनका हालिया अनुभव काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने साल 2022 के विधानसभा चुनाव में चकराता जैसी महत्वपूर्ण सीट से भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। उस कड़े चुनावी मुकाबले में उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रीतम सिंह को चुनौती दी थी। उस चुनाव में रामशरण नौटियाल को 27,417 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहकर हार का सामना करना पड़ा था, जबकि कांग्रेस के प्रीतम सिंह ने 36,853 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की थी।
देहरादून के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके रामशरण नौटियाल जौनसार-बावर की क्षेत्रीय राजनीति में हमेशा से एक सक्रिय चेहरा रहे हैं। पार्टी के भीतर उनके असंतोष की झलक साल 2023 में ही मिल गई थी, जब उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर स्थानीय भाजपा नेताओं की कार्यशैली पर खुलेआम सवाल खड़े किए थे।
उनके इस इस्तीफे के बाद अब उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर कयासों का बाजार पूरी तरह से गर्म हो गया है। फिलहाल उन्होंने किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने का कोई ऐलान नहीं किया है, लेकिन उनके पुराने राजनीतिक संबंधों को देखते हुए कांग्रेस में उनकी वापसी की अटकलें जोरों पर हैं। हालांकि, अभी तक न तो रामशरण नौटियाल और न ही कांग्रेस पार्टी की तरफ से इस संबंध में कोई पुष्टि की गई है।
चकराता और जौनसार-बावर क्षेत्र की राजनीति में रामशरण नौटियाल का यह कदम 2027 के चुनावों के लिहाज से एक बड़े बदलाव का संकेत है। जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, उत्तराखंड में राजनीतिक समीकरणों को साधने की कवायद और दलबदल की गतिविधियां तेज होने लगी हैं। अब सबकी नजरें नौटियाल के आगामी फैसले पर टिकी हुई हैं कि वे किस करवट बैठते हैं।



