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किडनी कांड: एक और आरोपी चढ़ा ऋषिकेश पुलिस के हत्थे

किडनी रैकेटदेहरादू। दून पुलिस ने जब से किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भांडा फोड़ा है तब से किडनी रैकेट में शामिल आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार करती आ रही है। ऋषिकेश से किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। ऋषिकेश की पुलिस ने इस कांड से जुड़े एक और आरोपी को हिरासत में ले लिया। आरोपी को पुलिस ने बुधवार को तप्पड़ स्थित डेंटल कॉलेज परिसर के भीतर गंगोत्री चेरिटेबल अस्पताल से पकड़ा है। यह 10वां ओरोपी बताया जा रहा है और साथ ही यह लैब तकनीशियन भी है।

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आरोपी को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। कोर्ट से उसे जेल भेज दिया गया है। दून पुलिस ने 11 सितंबर को गंगोत्री चेरिटेबल अस्पताल में किडनी रैकेट का खुलासा किया था। रैकेट में गिरफ्तार सरगना डा. अमित राउत और अन्य से पूछताछ में पुलिस को पता लगा कि अस्पताल में बतौर तकनीशियन श्रीनिवास चौहान निवासी चंद्रेश्वरनगर, चंद्रभागा, ऋषिकेश को रखा गया था। उसका नाम सामने आने के बाद डोईवाला पुलिस ने ऋषिकेश पुलिस के सहारे उसकी तलाश शुरू कर दी।

एसपी देहात सरिता डोभाल ने बताया कि श्रीनिवास को ऋषिकेश पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ऋषिकेश स्थित चंद्रभागा नदी पुल से वह पुलिस के हत्थे चढ़ा। जबकि मुख्य आरोपियों में रैकट संचालक का बेटा अक्षय कुमार उर्फ राउत और बिहार निवासी डाक्टर दंपति फरार हैं। श्रीनिवास को पकड़ने वाली पुलिस टीम में एसएसआई ऋषिकेश हेमंत द्विवेदी, कांस्टेबल देवेन्द्र चौधरी, नवनीत सिंह नेग,, मनोज कुमार और विपिन कुमार शामिल रहे। पुलिस के अनुसार अस्पताल में तैनात गार्ड भी डा. अमित और राजीव के जानने वाले थे। वह राजीव चौधरी की इजाजत के बिना किसी को अन्दर नहीं जाने देते थे। श्रीनिवास के कब्जे से पुलिस को किडनी बदलने संबंधी कई मरीजों की टेस्ट रिपोर्ट और एक्स-रे बरामद हुए हैं।

देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने किडनी कांड की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर एक डेंटल कॉलेज का अस्प्ताल कैसे लीज पर चल रहा था। उन्होंने डेंटल कांउसिल ऑफ इंडिया की कार्यप्रणाली पर भी सवालों को उठाए हैं। धस्माना ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के विधानसभा क्षेत्र में चल रहे डेंटल कॉलेज में किडनी रैकेट की सीबीआई जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अच्छा काम किया है, लेकिन अभी तक डेंटल कॉलेज पर कोई कार्रवाई नहीं होना अपने-आप में आश्चर्य है। अभी तक डेंटल कॉलेज प्रबंधकों से पूछताछ नहीं होना भी सवाल उठाता है। साथ ही डेंटल कॉलेज किन नियमों के तहत अपने अस्पताल को निजी संस्था को दूसरे काम के लिए कैसे लीज पर दे सकता है।

डेन्टल काउन्सिल ऑफ इंडिया की नियमावली के अनुसार यह अस्पताल डेंटल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए होता है और इसी आधार पर डेंटल कॉलेज की मान्यता भी मिलती है। फिर इस डेंटल कॉलेज की मान्यता कैसे संभव हो पाई। उन्होंने कहा कि एक ही बिलिं्डग में किडनी रैकेट चल रहा है और उसी अस्पताल में डेंटल कॉलेज के छात्रों की प्रैक्टिस चल रही है। तो फिर इस रैकेट का खुलासा पहले क्यों नहीं हुआ। अभी तक डेन्टल काउंसिल ऑफ इंडिया के पूरे घटनाक्रम का संज्ञान नहीं लेने की भी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
श्रीनिवास चौहान।

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