सोमवार , जून 18 2018

मर्दों का हार्मोनल लोचा कराता है शेयर मार्केट में दंगल : शोध

मर्दों का हार्मोनल लोचावैसे तो आये दिन किसी ना किसी मामले पर शोध आते ही रहते हैं। लेकिन आज जिस शोध का जिक्र हम करने जा रहे हैं वो बेहद ही चौकाने वाला तो है ही, साथ में पुरुषों की सबसे बड़ी खामी को भी उजागर करता है। वह कमी जिसे शायद ही कोई पुरुष आसानी से मानने को तैयार हो पाएगा। बता दें यह बात महज किसी कल्पना पर आधारित नहीं है। शोधकर्ताओं ने इसके टेस्ट को प्रमाणित करते हुए खुद इस बात की पुष्टि की है।

शोध के मुताबिक़ मर्दों में विशेष तौर पर पाया जाने वाला टेस्टोस्टेरोन हार्मोन शेयर बाजार में भारी उथल-पुथल का भी जिम्मेदार हो सकता है।

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वैसे तो इस हार्मोन का संबंध मर्दों की यौन क्षमता से होता है लेकिन एक स्टडी के मुताबिक, इसका उच्च स्तर मर्दों के कारोबारी व्यवहार को बदल सकता है, जिसका परिणाम शेयर बाजार में भारी उथल-पुथल भी हो सकता है।

स्कॉलर्स के मुताबिक, अमेरिकी शेयर बाजारों में काम करने वाले अधिकतर पेशेवर युवा हैं और नए प्रमाण दिखाते हैं कि जीवविज्ञान उनके कारोबारी व्यवहार को प्रभावित करता है। मैनेजमेंट साइंस जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक, शेयर बाजारों में उथल-पुथल का यह एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है।

कनाडा की वेस्टर्न यूनिवर्सिटी में आईवे बिजनेस स्कूल के एमोस नैडलर ने कहा, शोध के मुताबिक, पेशेवर माहौल में फैसले लेने की प्रक्रिया पर हार्मोन के प्रभावों को समझने की जरूरत है क्योंकि बायोलॉजिकल फैक्टर्स कैपिटल रिस्क के लिए खराब हो सकते हैं।

नैडलर ने कहा कि यह पहला अध्ययन है जो बताता है कि टेस्टोस्टेरोन की वजह से शेयर बाजार में रेट और रिटर्न की गणना करने को लेकर मानसिक स्थिति बदल जाती है।

इससे टेस्टोस्टेरोन का गणना प्रभाव कारोबारियों के खराब फैसले का कारण हो सकता है जब तक कि सिस्टम उन्हें ऐसा करने से नहीं रोके।

इस स्टडी में 140 युवाओं को शामिल किया गया, जिन्हें शेयर मार्केट में भाग लेने से पहले ऐसा जेल दिया गया, जिसमें टेस्टोस्टेरोन या प्लेसबो था।

इसके बाद उन्होंने बोलियां लगाई और कीमतों की पूछताछ की। साथ ही पैसा कमाने के लिए फाइनेंशियल असेट्स की खरीद-फरोख्त की।

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बाद में आंकलन करने पर पाया गया कि युवाओं के जिस ग्रुप को टेस्टोस्टेरोन मिला था उनकी बोलियां और कीमतें बुलबुले के समान भ्रामक थीं या उन्होंने लंबे समय तक गलत कीमत लगाई थी। जबकि प्लेसबो लेने वालों के साथ ऐसा नहीं था। प्लेसबो एक तरह की दवा होती है जो मनोचिकित्सकीय लाभ देती है।

स्कॉलर्स का मानना है कि टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के उच्च स्तर से कारोबारियों का रुझान बदलता है और वह शेयरों का भविष्योन्मुखी आंकलन जरूरत से ज्यादा करते हैं। इसका नुकसान कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि या फिर उसके बाद की तीव्र गिरावट के रूप में देखने को मिलता है।

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