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सितारों को गढ़ने वाला कलाई का जादूगर, जिसके शतक का मतलब होता था भारत अजेय

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में कई सितारों ने अपने हुनर और काबिलियत के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई। कुछ प्लेयर बलवान कहलाये तो वहीँ सचिन जैसे नायाब हीरे को क्रिकेट के भगवान की उपाधि से नवाजा गया। लेकिन सचिन और द्रविड़ सरीखे खिलाडियों के लिए भी एक ऐसा खिलाड़ी था जो प्रेरणा का माध्यम बना।

खिलाड़ी

भारत के इकलौते ऐसे क्रिकेटर जिनकी सेंचुरी का मतलब होता था कि टीम हारेगी नहीं। कलाई से शॉट खेलने में माहिर गुडप्पा विश्वनाथ आज अपना 69वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म 12 फरवरी 1949 को मैसूर में हुआ था। उन्होंने भारत के लिए 91 टेस्ट मैचों में 41.93 की औसत से 6080 रन बनाए।

इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वो नेशनल सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन भी रहे। विश्वनाथ ने ही सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ को 1996 में इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में चुना था और इन दोनों ने खूब नाम कमाया।

एक इंटरव्यू में विश्वनाथ ने कहा, ‘एक सफल टेस्ट बल्लेबाज बनने के लिए दो क्वालिटी होना बहुत जरूरी हैं। पहली तकनीकी रूप से सक्षम होना चाहिए और दूसरा मुश्किल हालातों में कैसे शांत रहा जाए ये उस व्यक्ति को आना चाहिए।’

जब उनसे सुनील गावस्कर के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘उनकी टेकनीक शानदार थी और साथ ही टेंपरामेंट का भी कोई तोड़ नहीं था। उनकी बेस्ट बात ये थी कि वो किस भी लेवल पर क्रिकेट खेल रहे हों लेकिन कभी अपना विकेट बस यूं गंवा नहीं देते थे।’

उनसे जब पूछा गया कि उनके करियर की कोई निराशाजनक बात रही है  तो उन्होंने जवाब दिया, ‘हां, जब मुझे टेस्ट क्रिकेट छोड़ना पड़ा था। 1982-83  में मेरा पाकिस्तान दौरा अच्छा नही रहा था लेकिन और भी कुछ खिलाड़ियों के लिए ये दौरा अच्छा नहीं था इसलिए मैं इंटरनेशनल क्रिकेट से एक छोटा सा ब्रेक लेना चाहता था लेकिन वो छोटा सा ब्रेक मेरे लिए परमानेंट ब्रेक हो गया था।’

विश्वनाथ ने अपने करियर में 14 सेंचुरी ठोंकी और इनमें से एक बार भी भारत को हार का सामना नहीं करना पड़ा था। चार बार टीम जीती  जबकि बाकी 10 मैच ड्रॉ रहे। विश्वनाथ का ये अनोखा रिकॉर्ड आज भी बरकरार है।

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